जीआरपी ने 63 किलो मादक पदार्थ का किया 'अंतिम संस्कार'
कानपुर में जीआरपी ने 63 किलो मादक पदार्थों (चरस, गांजा, अफीम, स्मैक, डायजापाम) का नष्टकरण किया। ये मादक पदार्थ कानपुर सेंट्रल के मालखाने में महीनों से पड़े थे। मादक पदार्थ की कीमत 74 लाख रुपये है। अब इसे विद्युत शवदाह गृह में जलाया जाएगा, जिससे धुएं से प्रदूषण भी नहीं होगा।

कानपुर। जीआरपी कानपुर सेंट्रल के मालखाने में महीनों से पड़े 63 किलो मादक पदार्थ (चरस, गांजा, अफीम, स्मैक, डायजापाम) का मंगलवार को जिला निस्तारण समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी में भैंरवघाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। जीआरपी के जरिए निस्तारित कराए गए मादक पदार्थ की कीमत बाजार में 74 लाख रुपये बताई गई है। जीआरपी प्रभारी ओएन सिंह ने बताया कि जीआरपी जो भी मादक पदार्थ बरामद करती है। इसका आरोपी जेल में पेश किया जाता है। पूरा माल भी पेश किया जाता है। आरोपी को जेल हुई तो माल को रेलवे पुलिस की अभिरक्षा में सुरक्षित रखने का फरमान देकर सौंप देती है।
मामले का विवेचक विवेचना के बाद जब चार्जशीट लगा देता है तो अदालत मालखाने में रखे गए मादक पदार्थ की सैंपलिंग राजपत्रित औऱ न्यायित अधिकारियों की मौजूदगी में कराती है। इस सैंपल को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया जाता है। इसके बाद मालखाना में माल खराब न हो तो जिला निस्तारण कमेटी के समक्ष प्रभारी निरीक्षक रिपोर्ट देता है कि अमुख मुकदमे के माल की सैंपलिंग हो गई है। जिला निस्तारण कमेटी रिपोर्ट का सत्यापन कराने के बाद मुकदमा माल नष्ट करने की इजाजत देती है। इजाजत मिलने के बाद विवेचक या प्रभारी माल को लेकर शवदाह गृह ले जाते हैं। वहीं पर इसे जला दिया जाता है। अभी तक जीआरपी माल को कमेटी के समक्ष खुले आसमान जलाती थी। एनजीटी के निर्देशों के तहत मादक पदार्थ का धुआं हवा में फैलता है। इस कारण अब माल को विद्युत शवदाह गृह में सभी जिम्मेदारों की मौजूदगी में जलाया जाता है।
लेखक के बारे में
Ram Mahesh Mishraशॉर्ट बायो: राममहेश मिश्र पिछले 31 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड में रेलवे, रोडवेज,कैंट, भाजपा, एय़रपोर्ट बीट की रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
राम महेश मिश्र पत्रकारिता जगत में कानपुर में पहचान है। पत्रकारिता में 31 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में एचएमवीएल में काम कर रहे हैं। रेलवे, भाजपा, रोडवेज, एय़रपोर् विभाग में अच्छी पकड़ है।
करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
राममहेश मिश्र ने अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष - 1995 हिन्दैदी दैनिक आज से की थी। इसके बाद हिन्दी दैनिक अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबारों से की। उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। वर्ष - 2014 में हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान के साथ काम शुरू किया। अभी भी हिन्दुस्तान अखबार में कार्यरत है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मेडिकल रिपोर्टिंग
एमए हिन्दी और मास कम्युनिकेशन कोर्स के साथ रेलवे की पत्रकारिता में विशेष रूप से काम किया। अभी भी रेलवे और एय़रपोर्ट की स्थानीय स्तर पर होने वाली खबरें और एक्सक्लूसिव खबरें भी निरंतर देने का प्रयास जारी है।
विजन
मानवीय संवेदना की खबरो को अपने विभाग में देखना। राष्ट्रीय घटनाओं की अपने विभाग से कनेक्टिविटी करके उससे संबंधित खबरें फाइल करना मुख्य ध्येय रहता है। इसमें काफी हद तक सफल भी होते हैं। इसके साथ ही अन्य हित की समस्याओं को प्राथमिकता से प्रकाशित करके उन पर असर और निरंतर तब तक फॉलो करते हैं, जब तक असर नहीं होता है।
विशेषज्ञता
रेलवे की दुर्घटनाओं पुर मौके पर जाने की जिज्ञासा निरंतर रहती है।
घटना की वजह जानने के साथ मानवीय संवेदनाओं पर पैनी नदर रखना
विभाग में सेलिब्रिटी के आने पर उनका एक्सक्लूसिव इंटरव्यू करना
रेलवे में होने वाले रिसर्च की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करना
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


