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28 अक्तूबर, 2020|11:12|IST

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रनियां औद्योगिक क्षेत्र की अधिकांश फैक्ट्रियां बंद होने से 50 हजार मजदूर बेरोजगार

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यह सही है कि कोरोना को रोकने के लिए लॉकडाउन जरूरी है लेकिन इससे उद्योग व कारोबार पर विपरीत असर पड़ रहा है। इससे लोगों को परेशानी भी हो रही है। कानपुर देहात की अगर बात करें तो यहां पर वनस्पति फैक्ट्रियों की भरमार है। या यूं कहें की यह अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लॉकडाउन के बाद इन फैक्ट्री में श्रमिकों व पल्लेदारों पर बुरा असर पड़ा है। उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि लॉकडाउन अवधि का भुगतान ज्यादातर फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है। कानपुर देहात में लगभग 7000 करोड़ रुपए का मासिक टर्नओवर रहता था जो वर्तमान में 3 अंक पर सिमटकर रह गया है। इसके अलावा पूरे जिले में लगभग 500 कारोबारी कारोबार से जुड़े हैं। लॉकडाउन अवधि में अधिकतम 40 से 50 इंडस्ट्री ही चल पा रही हैं। ऐसे में लगभग साढे चार सौ कारोबारी घरों में बैठा है। इसके अलावा पूरे जिले में औद्योगिक इकाइयों तथा अन्य कारोबार में लगभग 40 से 50 हजार लोगों को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से रोजगार मिल रहा था। लॉक डाउन में ज्यादातर लोग घरों में ही बैठे हैं। फैक्ट्रियों में मजदूरों की संख्या कम होने के चलते उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ रहा है। इस समय लगभग कारोबारियों को 100 करोड़ रुपए प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद भी इसका असर एक साल तक उद्योगों पर दिख सकता है। खासकर जिले के छोटे एवं मध्यम उद्योगों पर इसका ज्यादा असर दिखेगा। आईआईए चेयरमैन आलोक जैन ने कहा कि इस संकट से उबरने के बाद औद्योगिक क्षेत्र को उबारने में बड़े प्रयास करने होंगे। उपायुक्त उद्योग चंद्रभान ने बताया कि जनपद में लगभग 3000 इंडस्ट्री एमएसएमई सेक्टर में पंजीकृत हैं। उनमें से लगभग 700 ऐसे इंडस्ट्री है जो अस्तत्वि में है। लॉक डाउन अवधि में पशु आहार, खाद्य तेल, आटा, चावल, दूध, ब्रेड जैसी फैक्ट्रियों को मिलाकर लगभग 50 इंडस्ट्री ही चल पा रही है । उन्होंने बताया की मंटोरा तथा कानपुर एडबिल फैक्ट्रियों में उत्पादन में कमी आई है। लॉक डाउन के चलते श्रमिकों की कमी है। जिससे 500 टन प्रतिदिन क्षमता वाली इन इंडस्ट्री में 250 टन ही उत्पादन हो पा रहा है।

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  • Web Title:50 thousand laborers unemployed due to closure of most of the factories in the industrial sector