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डकैत गिरोह की 220 घंटे की घेराबंदी, सीधी मुठभेड़ के बजाय बाहर निकलने का इंतजार

Dangat gang was using the water of this well of the forest

चित्रकूट के निही जंगल में डकैत गिरोह की 220 घंटे की घेराबंदी के बाद पुलिस अफसरों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। सीधी मुठभेड़ के बजाय अब डकैत गिरोह को भूख-प्यास से बेहाल कर बाहर निकलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पुलिस को इंतजार है कि कब गिरोह बाहर निकले और उसको मार गिराया जाए।

निही के जंगल में 5.30 लाख इनामी बबुली कोल गिरोह से गुरुवार सुबह पांच बड़े मुठभेड़ शुरू हुई थी। मुठभेड़ में एक दरोगा शहीद हो गए, पुलिस ने दावा किया कि एक डकैत को मार गिराया हालांकि उसकी लाश पुलिस को नहीं मिल पायी। इसके बाद से लगातार गिरोह की धेराबंदी जारी है। बबुली कोल बचे साथियों को लेकर धौरहरा के पहाड़ पर चढ़ गया है, पुलिस का दावा है कि उसे भी गोली लगी है और इलाज के लिए वह बाहर जरूर निकलेगा।

पांच किमी में फैला पहाड़

बबुली कोल जिस धौरहरा पहाड़ पर डेरा जमाए हुए है वह 5-6 किमी में फैला है। पुलिस और पीएसी पहाड़ से आधआ किमी दूरी से घेरा बनाए हुए है। पुलिस का पूरा ध्यान पहाड़ से निकल कर गावों की तरफ जाने वाले रास्तो पर है। यह तो तय है कि डकैत गिरोह तक रसद और दवाएं पहुंच रहीं हैं क्योंकि इतने दिनों तक वे भूख-प्यास से ही मर जाते। 

कोबरा छान रही जंगल

पीएसी की कोबरा कंपनी ही पहाड़ के आसपास जंगल छान रही है, उसकी नजर डकैत गिरोह तक रसद और दवाएं पहुंचाने वालों पर है। पुलिस की सर्विलांस टीम ने खुद बबुली का फोन सुना है जिसमें उस तक दवा पहुंचने की पुष्टि हुई थी। पुलिस की रणनीति है कि उस तक कोई मदद न पुंच पाए और मजबूर होकर वह बाहर आए। एक डर यह भी है कि वह पहाड़ के पीछे धौरहरा के जंगल में न उतर जाए, यह जंगल बेहद घना है।

 

 

 

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  • Web Title:220-hour siege of the Dacoit gang, waiting for the exit instead of a direct encounter