कानपुर का रठि गांव बना 'जामताड़ा', 12वीं फेल लड़के बने साइबर फ्रॉड के मास्टर, 10 साल से नहीं हुई चोरी
ग्रामीण बताते हैं कि पहले गांव में बेरोजगारी थे, युवक दूसरे प्रदेशों में जाकर कमाई करते थे। जो बाहर नहीं जाते थे वह चोरी आदि में लगे रहते थे। पिछले एक दशक से यहां के युवक साइबर ठगी में लगे हैं और रुपये कमा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि रठि गांव में बीते एक दशक से चोरी की घटना नहीं हुई।

जामताड़ा की तरह कानपुर के रेउना का रठि गांव पूरे जिले में साइबर ठगी के लिए मशहूर है। करीब एक दशक से यहां युवाओं की एक बड़ी टीम सक्रिय है जो सुबह से ही इस काम में जुट जाती है। चेहरे से साधारण दिखने वाले शातिर बड़े-अधिकारियों और व्यापारियों को बातों में फंसा कर लाखों रुपये पार कर देते हैं। ठगी के खेल में युवाओं ने यहां करोड़ो रुपये कमाये हैं। सब कुछ जानते हुए भी पुलिस की कार्रवाई नगण्य रही है। पहली बार यहां कार्रवाई हुई है। ।
कानपुर का रठि गांव बना मिनी जामताड़ा
रेउना के रठि गांव में पिछले एक दशक से मिनी जामताड़ा फलफूल रहा है। इस गांव के 12वीं फेल लड़कों ने अब तक देशभर के 4000 से ज्यादा लाोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया। और लाखों रुपए का चूना लगा चुके हैं। किसी को सरकारी योजनाओं का लाभ देने के नाम पर फंसाया तो किसी को अश्लील वीडियो के नाम पर डराकर वसूली की। बैंक अकाउंट में आने वाले रुपये कहीं फ्रीज न हो जाएं इसके लिए यह तीन लेयर तक के खातों का प्रयोग किया। खातों का जुगाड़ अपने ही सगे संबंधियों के फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर खुलवाया। इसमें बैंक कर्मियों की मिलीभगत की जांच भी पुलिस कर रही है। फिलहाल गिरफ्तार सभी 20 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। इन पर साइबर ठगी संग फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग करने का भी आरोप है। 17 आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है।
15 से 50 साल के अधेड़ तक साइबर फ्रॉड में शामिल
रठि गांव में मंगलवार को हुई कार्रवाई के बाद बुधवार को गांव का माहौल पूरी तरह से अलग था। इस गांव में चल रहे साइबर के धंधे की पड़ताल करने हिन्दुस्तान संवाददाता मौके पर पहुंचा तो गांव में प्रवेश करते ही कुछ लोग कार्रवाई की ही चर्चा करते दिखाई दिए। पकड़े गए अधिकतर युवक गांव के ही हैं लिहाजा कुछ पूछने पर ग्रामीण चुप हो गए। गांव के अंदर की गलियों में भी सन्नाटा पसरा था। खेत में किसान गेहूं कटाई में जुटे थे लेकिन सब कुछ जानकर भी अंजान बन रहे थे।
गांव के एक दो लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह काम आज से हो रहा है क्या, सालों गुजर गए। बताया, गांव के 15 साल के किशोर से लेकर 50 साल तक के अधेड़ सभी इस काम में जुटे हैं। युवा इस काम में पूरी तरह माहिर हैं। इनकी संख्या भी बड़ी है। यह सभी खेत, खलिहानों में सुबह से शाम तक फोन करके लोगों को शिकार बनाया करते हैं। गांव के बहुत से युवा इस काम को छोड़ चुके हैं और कुछ ने इससे रुपया कमाने के बाद दूसरे व्यवसाय शुरु कर दिये। कई युवक बाहर जाकर बस गए।
बीते 10 सालों में गांव में नहीं हुई चोरी
ग्रामीण बताते हैं कि पहले गांव में बेरोजगारी थे, युवक दूसरे प्रदेशों में जाकर कमाई करते थे। जो बाहर नहीं जाते थे वह चोरी आदि में लगे रहते थे। पिछले एक दशक से यहां के युवक साइबर ठगी में लगे हैं और रुपये कमा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि रठि गांव में बीते एक दशक से चोरी की घटना नहीं हुई। क्योंकि सारे बेरोजगार व असमाजिक तत्व इसी काम में रुपया कमाने में जुटे हैं। गांव के एक व्यक्ति बताते हैं कि गांव ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों में चोरियां नहीं होती हैं।
12वीं फेल लड़के लाखों की ठगी को दे रहे अंजाम
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि रेउना के रठि गांव में साइबर ठगों के बड़े नेटवर्क की सूचना मिली थी। ऐसे में इनकी धरपकड़ के लिए तीन अधिकारियों को लगाया गया। जांच कराई गई तो पता चला कि गांव के युवक कई साल पहले तमिलनाडु की कॉटन थ्रेड मिल में 10 से 12 हजार रुपयों में नौकरी करते थे। यहीं यह युवक साइबर ठगों के संपर्क में आए और ठगी सीख ली। बिना कुछ किए हजारों रुपये की कमाई के लालच में युवक गांव आ गए और बेरोजगार लड़कों को भी यह काम सिखा दिया। जिसके बाद रेउना का रठि गांव मिनी जामताड़ा में बदल गया।
20 साइबर ठग को पुलिस ने दबोचा
गांव के 50 से ज्यादा लड़के, युवा और अधेड़ इस काम में शामिल हैं। मंगलवार की शाम 4 बजे यहां स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के प्रभारी एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके के निर्देशन में घाटमपुर सर्किल के 200 से ज्यादा पुलिस कर्मियों ने गांव के लाले बाबा मंदिर के आगे स्थित बाग में छापा मारा। इस छापे से पहले पुलिस ने ड्रोन से मिली फुटेज के आधार पर बाग को चारों ओर से घेर लिया। पुलिस जैसी ही बाग में घुसी, वहां टेंट लगाकर युवक साइबर ठगी में जुटे थे। 20 युवकों को पुलिस ने धर दबोचा। पुलिस आयुक्त ने बताया कि सभी को जेल भेज दिया गया है।


