पुलिस ने जब पूछे ये 15 सवाल तो टूट गई शालू, चीखकर बोली- हां मैंने मरवाया है

हिन्दुस्तान, कानपुर
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुई विनीत मिनोचा के मर्डर की गुत्थी सुलझा ली गई है और साजिशकर्ता और कोई नहीं, बल्कि दवा कारोबारी की बहू शालू निकली है। जब पुलिस से शालू का सामना हुआ, तो वह ज्यादा देर नहीं टिकी और गुनाह मान लिया।

Vineet Minocha Kanpur
विनीत मिनोचा कानपुर के बड़े कारोबारी हैं और उनकी बहू शालू ने ही हत्या करा दी थी।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की साजिश 21 दिन पहले रची गई थी। साजिश के बाद फूलप्रूफ प्लान घर के बाहर बनाया गया। ओरिजनल चाबी से डुप्लीकेट चाबी भी गुमटी में बनी थी। बहू शालू ने विनीत के पूर्व कर्मचारी विशाल को छह लाख रुपये में सुपारी दी थी। हत्या के लिए पांच सितंबर की तारीख भी शालू ने ही तय की थी। सोमवार को एक से डेढ़ घंटे की पुलिस की पूछताछ में उसने यह सब कुबूल कर लिया। उसके कुबूलनामे से परिजन भी हैरत में हैं। शालू ने ससुर को मारने की साजिश शॉपिंग करने के दौरान बनाई थी। उधर, विनीत की हत्या में उनके बेटे के राजदार होने को लेकर पुलिस की जांच चल रही है।

रविवार को विनीत मनोचा की हत्या के बाद मुठभेड़ में दबोचे गए हरबंश मोहाल निवासी विशाल गौतम और राजकिशोर ने कुबूल किया था कि उन्होंने विनीत की बहू शालू के कहने पर हत्या की है। जिसके बाद पुलिस एक्टिव हुई। रात में ही पुलिस ने शालू को पूछताछ के लिए उठा लिया था। सुबह परिजनों और रतन आर्बिट अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड मदन सिंह को बुलाया गया।

चीखकर कुबूला जुर्म

पुलिस ने पहले शालू से पूछताछ की लेकिन वह किसी तरह की साजिश में शामिल होने की बात से इंकार करती रही। इसके बाद पुलिस ने पति सुब्रत, सास पुनीता, विनीत के भाई और विशाल गौतम का आमना सामना कराया गया। परिवार के सामने ही पुलिस ने 15 सवाल पूछे। सूत्रों के मुताबिक साक्ष्य सामने रखे तो वह टूट गई और चीखते हुए अपना जुर्म कुबूल कर लिया। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

ऐसे हुए सवाल जवाब

पुलिस ने शालू से पूछताछ शुरू की तो वह खुद को निर्दोष बताती रही। इसके बाद पुलिस ने परिजनों, हत्यारोपी, सिक्योरिटी गार्ड सभी को बिठाकर आमना सामना कराया। शालू से पुलिस ने पहला सवाल किया तो उसने सिरे से खारिज कर दिया। दूसरे सवाल में वह हिचकिचाई और उसके बाद उसके चेहरे की हवाईंया उड़ती चली गईं। पति, सास और देवर कहते रहे..जवाब दो। बताओ शालू तुम इन सबमे में शामिल नहीं हो। शालू ने उन्हें देखा और चुप होकर आंखे झुका ली। परिवार भी समझ गया कि विशाल ने जो आरोप लगाए हैं, वह गलत नहीं हैं। शालू से पूछताछ के प्रमुख अंश..

पुलिस के 15 सवालों में टूट गई शालू

●पुलिस : विशाल ने बताया कि आपके कहने पर हत्या की है।

●शालू : वो झूठ बोल रहा है।

●पुलिस : विशाल ने बताया कि डुप्लीकेट चाबी बनवाने के लिए ओरिजनल चाबी उसे आपने दी थी।

●शालू : मैंने कोई चाबी नहीं दी।

●पुलिस : विशाल व राजकिशोर ने बताया कि छह लाख रुपये में आपने सुपारी दी थी।

●शालू : सुपारी दी थी तो रुपये भी दिए होंगे। क्या वह बरामद हुए।

●पुलिस : तो आपने ससुर की हत्या की सुपारी नहीं दी थी।

●शालू : बिल्कुल नहीं

●पुलिस : विशाल को शिवम बताकर इंट्री कराने के लिए आपने सिक्योरिटी गार्ड को फोन क्यों किया

●शालू : मैंने फोन नहीं किया

●पुलिस : आपका सीडीआर हमारे पास है और सिक्योरिटी गार्ड मदन सिंह ने भी यही बताया है

●शालू : कोई जवाब नहीं

●पुलिस : गुमटी में तीन बार आप विशाल से मिलीं, इसके फुटेज हमारे पास हैं

●शालू : कोई जवाब नहीं

●पुलिस : विशाल से आपकी लगातार बात होती है। आपके दोनों नंबरों की सीडीआर हमारे पास है।

●शालू : कोई जवाब नहीं

पति का नाम लेना

पुलिस पूछताछ में विशाल ने दावा किया कि हत्या की साजिश शालू ने रची थी। उसके अनुसार हत्या के लिए छह लाख रुपये में सौदा तय हुआ था, जिसमें दो लाख रुपये घटना के दिन और शेष चार लाख रुपये 15 दिन बाद देने की बात कही गई थी। विशाल ने बताया कि शालू ने पकड़े जाने पर उसका नाम न लेने और पति सुब्रत को जिम्मेदार बताने के लिए कहा था। हालांकि उसने पुलिस से कहा कि सुब्रत का नाम लेने की हिम्मत नहीं हुई, क्योंकि वह उसे अच्छा इंसान मानता है।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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