कानपुर के कुत्तों में डाली जाएगी माइक्रोचिप; नगर निगम की अनूठी पहल की वजह जानिए

Apr 09, 2026 02:30 pm ISTsandeep हिन्दुस्तान, मुख्य संवाददाता, कानपुर
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बताया जा रहा है कि चिप को इंजेक्शन के जरिए कुत्तों की खाल में इम्प्लांट किया जाएगा। चिप से हर कुत्ते का पहचान नंबर जेनरेट हो जाएगा। चिप की कनेक्टिविटी इसके लिए बनाए गए साफ्टवेयर के जरिए होगी। इस साफ्टवेयर को भी एबीसी सेंटर में इंस्टाल करना होगा। इसके बाद मॉनीटर पर देखा जा सकेगा कि कुत्ता कहां है?

कानपुर के कुत्तों में डाली जाएगी माइक्रोचिप; नगर निगम की अनूठी पहल की वजह जानिए

कानपुर शहर में उन सभी आवारा कुत्तों में माइक्रोचिप लगेगी जिनकी नसबंदी नगर निगम द्वारा कराई जाएगी। इस चिप के जरिए इन कुत्तों की पहचान तो होगी ही, उनकी लोकेशन भी पता चल सकेगी। फौरन जान सकेंगे कि कुत्ता जिंदा है या नहीं। नसबंदी के लिए दोबारा पकड़े जाने की गलती भी नहीं होगी। अभी तक देश में चेन्नई में यह चिप पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। अब नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कानपुर में इसके इस्तेमाल का फैसला लिया है। बुधवार को फूलबाग स्थित कुत्ता जन्म नियंत्रण केंद्र (एबीसी सेंटर) का निरीक्षण करने गए नगर आयुक्त ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके निरंजन को निर्देश दिया कि चेन्नई के प्रोजेक्ट का ड्राफ्ट यहां मंगाएं और तीन दिन में रिपोर्ट दें। इसके साथ ही चिप का साफ्टवेयर भी मंगा लें ताकि कंट्रोल से निगरानी हो सके।

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि अभी नसबंदी के साथ ही कुत्तों के वी शेप में कान काट दिए जाते हैं। इस प्रक्रिया को इयर नॉचिंग कहते हैं। नर कुत्तों के अंडकोष भी निकाल दिए जाते हैं ताकि पहचान हो सके। नसबंदी किए गए मादा कुत्तों की पहचान कई बार मुश्किल हो जाती है। चिप से कुत्तों की आईडी भी होगी और लोकेशन भी मिल जाएगी।

कुत्तों की खाल में इम्प्लांट होगी चिप

चिप को इंजेक्शन के जरिए कुत्तों की खाल में इम्प्लांट किया जाएगा। चिप से हर कुत्ते का पहचान नंबर जेनरेट हो जाएगा। चिप की कनेक्टिविटी इसके लिए बनाए गए साफ्टवेयर के जरिए होगी। इस साफ्टवेयर को भी एबीसी सेंटर में इंस्टाल करना होगा। इसके बाद मॉनीटर पर देखा जा सकेगा कि कुत्ता कहां है?

चेन्नई में चिप का हो रहा इस्तेमाल

आपको बता दें अभी तक निजी तौर पर पाले गए महंगे कुत्तों को तलाशने के लिए लोग माइक्रो चिप का इस्तेमाल करते थे। पहली बार ऐसा होगा जब इससे वे आवारा कुत्ते पहचाने जाएंगे जिनकी नसबंदी की जा चुकी है। इस चिप के चेन्नई में हो रहे इस्तेमाल को जानने को वहां के अफसरों से वार्ता शुरू की गई है। प्रेजेंटेशन भी यहां होगा। बुधवार को फूलबाग स्थित कुत्ता जन्म नियंत्रण केंद्र (एबीसी सेंटर) का निरीक्षण करने पहुंचे नगर आयुक्त को मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने नसबंदी के साथ पहचान के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया बताई।

पालतू कुत्तों में होता है चिप का इस्तेमाल

नगर आयुक्त ने कहा कि पुरानी पद्धति खत्म करें, माइक्रो चिप लगाएं। डॉ. निरंजन ने बताया आम तौर पर माइक्रो चिप का इस्तेमाल पालतू कुत्तों के लिए होता है। यह चिप जीपीएस लोकेशन की तरह काम करता है। डॉ. निरंजन ने नगर आयुक्त को बताया रोज 60 और माहवार 1800 कुत्तों की सर्जरी एबीसी सेंटरों में फ्रेंडिकोज संस्था द्वारा की जा रही है। नसबंदी के बाद कुत्तों को मूल स्थान पर छोड़ दिया जाता है।

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