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12 अगस्त, 2020|11:57|IST

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फरीदाबाद की कम्पनी में करते थे काम, घर आकर काट रहे गेहूं

फरीदाबाद की कम्पनी में करते थे काम, घर आकर काट रहे गेहूं

क्षेत्र के अहिरुआ राजारामपुर गांव के युवक हरियाणा के फरीदाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के चलते वहां से पैदल ही घर के लिए निकल दिए। भूखे-प्यासे किसी तरह छिबरामऊ पहुंचे। यहां थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया। अब वह घर पर हैं और खेतों में ¦गेहूं की कटाई कर किसी तरह परिवार का भरणपोषण कर रहे हैं।

अहिरुआ राजारामपुर के रहने वाले विवेक कुमार पुत्र सर्वेश फरीदाबाद की एक एक्सपोर्ट कंपनी में हेल्पर के पद पर कार्य करते थे। वहां उन्हें अभी 21 दिन ही काम करते हुए थे, तब तक कोरोना वायरस को लेकर देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। ऐसे में वह 27 मार्च की सुबह नौ बजे अपने घर के लिए पैदल ही चल दिए। रास्ते में थोड़ी-थोड़ी दूरी के वाहन मिले, तो सवार हो लिए। वहां से चलने से पूर्व कंपनी ने उन्हें 21 दिन की तनख्वाह दे दी।

विवेक ने बताया कि रास्ते में उन्हें खाने-पीने को तो कुछ नहीं मिला। भूखे-प्यासे कभी पैदल तो कभी किसी गाड़ी से सफर कर वह 28 मार्च की दोपहर छिबरामऊ पहुंचे। यहां वह सौ शैय्या अस्पताल गए और अपनी जांच कराई। जांच के बाद उन्हें गांव के ही प्राथमिक वद्यिालय में 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया। वह समय पूरा करने के बाद अब घर पर हैं। फिलहाल बंदी के चलते कहीं कोई मजदूरी नहीं मिल रही है। गांव में ही गेहूं की कटाई कर जो भी मेहनत-मजदूरी मिलती है, उसी से परिवार पाल रहे हैं।

मासूम बच्चे के साथ बाइक से लौटा गांव

छिबरामऊ। अहिरुआ राजारामपुर के अवधेश कुमार फरीदाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में चपरासी था। लॉकडाउन घोषित होते ही वह 28 मार्च को अपनी पत्नी सोनी और 15 माह के मासूम बेटे अंशू के साथ बाइक से अपने गांव के लिए चल दिया। अगले दिन गांव पहुंचा। पहले तो उसे गांव के प्राथमिक वद्यिालय में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में रखा गया। अब वह घर पर रहकर गांव में ही खेतों में काम कर अपने परिवार का भरणपोषण करने को मजबूर है।

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  • Web Title:Used to work in Faridabad company cutting wheat after coming home