Kannauj News: छह दिन से बंद अल्ट्रासाउंड, निजी सेंटरों पर बढ़ी भीड़, मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ

हिन्दुस्तान, कन्नौज
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Kannauj News: फोटो 26 शहर के एक निजी जांच केंद्र पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बैठे मरीज कन्नौज, संवाददाता। जिला अस्पताल में पिछले छह दिनों से अल्ट्रासाउंड जांच सेवा

Kannauj News: छह दिन से बंद अल्ट्रासाउंड, निजी सेंटरों पर बढ़ी भीड़, मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ

Kannauj News: कन्नौज, संवाददाता। जिला अस्पताल में पिछले छह दिनों से अल्ट्रासाउंड जांच सेवा ठप होने से मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। जांच के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बिना अल्ट्रासाउंड कराए लौटना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों और मेडिको-लीगल मामलों से जुड़े लोगों को हो रही है। अस्पताल में तैनात एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय सैनी के करीब 40 दिन के अवकाश पर जाने के बाद से यह स्थिति बनी है। वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से सरकारी अस्पताल की निशुल्क अथवा कम लागत वाली जांच का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं होने के कारण मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को भी निजी केंद्रों पर जांच कराने की सलाह दी जा रही है। निजी केंद्रों पर सामान्य गर्भावस्था जांच के लिए करीब 500 से 1,000 रुपये तक खर्च हो रहे हैं, जबकि अन्य जांचों के लिए भी मरीजों को अपनी जरूरत के मुताबिक 700 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बन गया है। जिले में कुल 35 पंजीकृत निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं, जिनमें छह सेंटर कन्नौज शहर में संचालित हैं। सरकारी अस्पताल की सेवा बंद होने से इन केंद्रों पर मरीजों की संख्या बढ़ने से भीड़ का दबाव बढ़ गया है। दूर-दराज के क्षेत्रों से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को पहले अस्पताल में जांच बंद होने की जानकारी मिलती है और फिर उन्हें निजी केंद्र की तलाश में भटकना पड़ता है। इससे उनका समय और आने-जाने का खर्च भी बढ़ रहा है। अल्ट्रासाउंड कई रोगों की जांच के लिए महत्वपूर्ण है। पेट और पैल्विक जांच में यकृत, पित्ताशय, गुर्दे, तिल्ली, अग्न्याशय, मूत्राशय तथा महिलाओं के गर्भाशय और अंडाशय की स्थिति देखी जाती है। गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास, हृदय की धड़कन और गर्भ में द्रव की स्थिति का आकलन भी अल्ट्रासाउंड से किया जाता है। रक्त प्रवाह की जांच के लिए रंगीन डॉप्लर जैसी जांच भी जरूरी होती है। ऐसे में सेवा बंद होने का असर केवल सामान्य मरीजों तक सीमित नहीं है। इससे उपचार और जांच की प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ ही अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है。

गर्भवती महिलाओं की सबसे ज्यादा मुश्किल

मरीजों का कहना है कि जिला अस्पताल में आने का मुख्य उद्देश्य कम खर्च में उपचार और जांच कराना होता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्र भेजे जाने से उनकी जेब पर अचानक अतिरिक्त भार पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह स्थिति अधिक कठिन है। मरीजों की मांग है कि रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था कराकर जल्द से जल्द अल्ट्रासाउंड सेवा बहाल की जाए, ताकि उन्हें निजी केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें।

शहर के छह निजी केंद्रों पर बढ़ी भीड़

अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने का सबसे सीधा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक की सलाह पर समय-समय पर भ्रूण के विकास, हृदय की धड़कन, गर्भ में द्रव की स्थिति और अन्य जरूरी पहलुओं की जांच कराई जाती है। जिला अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने पर महिलाओं को निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। इससे जांच का खर्च बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाओं के लिए परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि पहले जिला अस्पताल तक पहुंचने में किराया खर्च होता है और जांच बंद मिलने पर निजी केंद्र तक जाने का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। सामान्य गर्भावस्था जांच में भी कई सौ रुपये खर्च हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह रकम छोटी नहीं है। मरीजों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल जाए तो उनका काफी खर्च बच सकता है। महिलाओं के परिजनों ने जल्द वैकल्पिक रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था करने की मांग की है।

एक रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश से ठप हुई सेवा

जिला医院 में अल्ट्रासाउंड की सरकारी सुविधा बंद होने का असर शहर के छह निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल से जांच के लिए लौटाए जा रहे मरीज निजी केंद्रों का रुख कर रहे हैं। इससे इन केंद्रों पर मरीजों की संख्या बढ़ रही है और जांच कराने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। जिले में कुल 35 पंजीकृत निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं, लेकिन जिला मुख्यालय आने वाले अधिकांश मरीज शहर के केंद्रों पर ही निर्भर हैं। अस्पताल में छह दिन से सेवा बंद होने के कारण यह दबाव लगातार बना हुआ है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा शुरू होने से निजी केंद्रों पर भीड़ कम होगी और जरूरतमंद मरीजों को समय पर जांच मिल सकेगी। वहीं, निजी जांच का खर्च उठाने में असमर्थ मरीजों के सामने आर्थिक संकट और गहरा रहा है।

जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड सेवा एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय सैनी पर निर्भर है। उनके करीब 40 दिन के अवकाश पर जाने के बाद छह दिनों से जांच सेवा बंद है। इससे सवाल यह भी उठ रहा है कि एक चिकित्सक के अवकाश पर जाने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। अस्पताल में रोजाना अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। कई मरीजों को चिकित्सक की सलाह के बाद अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी होता है। ऐसे में सेवा बंद रहने से मरीजों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को पहले से वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। छह दिन बीतने के बाद भी सेवा शुरू नहीं होने से परेशानी बढ़ती जा रही है। मरीजों ने मांग की है कि अवकाश अवधि के लिए दूसरे रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती अथवा वैकल्पिक व्यवस्था कराकर सेवा तत्काल बहाल की जाए।

निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अनुमानित जांच शुल्क

अल्ट्रासाउंड जांच

अनुमानित शुल्क

पेट का अल्ट्रासाउंड (ऊपरी/निचला पेट)

500–1,000

पूरे पेट की जांच

700–1,300

गर्भावस्था का सामान्य अल्ट्रासाउंड

500–1,000

ट्रांसवैजाइनल सोनोग्राफी (टीवीएस)

900–1,500

छोटे अंगों की जांच (थायराइड/स्तन)

700–1,500

बोले मरीज

जिला अस्पताल में छह दिन से अल्ट्रासाउंड बंद है। बाहर निजी सेंटर जाना पड़ रहा है। जांच के साथ आने-जाने का खर्च भी बढ़ गया है।

सरकारी अस्पताल में जांच की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन सुविधा बंद मिली। निजी सेंटर में पैसे देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है, जिससे परेशानी बढ़ी।

दूर से जिला अस्पताल आया था, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। अब निजी सेंटर जाना पड़ेगा। गरीब मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च काफी मुश्किल है।

अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए निजी सेंटर में भीड़ लगी है। छह दिन से सरकारी सुविधा बंद होने से मरीज परेशान हैं। जल्द जांच सेवा शुरू होनी चाहिए।

डॉ. विकास चंद्रा सीएमओ

जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न हो पाने की समस्या को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को भी समस्या से अवगत कराते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई है। एसे में आगे शासन से जो भी निर्देश आता है उसका पालन किया जाएगा।- डॉ. विकास चंद्रा सीएमओ

सामान्य प्रश्न

✦जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद क्यों है?−
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय सैनी के 40 दिन के अवकाश पर जाने के कारण बंद है।
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