Friday, January 21, 2022
हमें फॉलो करें :

मल्टीमीडिया

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेश कन्नौजकालबेलिया नृत्य का चला जादू, बबाई नृत्य ने मचाया धमाल

कालबेलिया नृत्य का चला जादू, बबाई नृत्य ने मचाया धमाल

हिन्दुस्तान टीम,कन्नौजNewswrap
Wed, 01 Dec 2021 11:35 PM
कालबेलिया नृत्य का चला जादू, बबाई नृत्य ने मचाया धमाल

छिबरामऊ। संवाददाता

स्पिक मैके की ओर से राजस्थानी कलाकारों ने नगर के सुप्रभाष अकादमी में जब कालबेलिया और बबाई नृत्य की प्रस्तुति दी, तो विद्यालय का तरंग रंगमंच उत्साह और रोमांच से गूंज उठा। परिसर नृत्य की प्रस्तुति देख तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजाएमान हो गया।

नगर की आवास विकास काॅलोनी स्थित सुप्रभाष अकादमी के तरंग रंग मंच पर स्पिक मैके की ओर से राजस्थानी लोक कला व विश्व प्रसिद्ध पारंपरिक नृत्य कालबेलिया का आयोजन जोधपुर के सुरमनाथ एंड कालबेलिया डांस ग्रुप ने कार्यक्रम पेश किया। राजस्थानी गायक महबूब खां, साबिर खां व कासिम खां ने गीत प्रस्तुत किए। सिकंदर खां ने मोरचंग व खड़ताल बजाई। निजामुद्दीन ने ढोलक और सुरमनाथ ने मजीरे के साथ संगत दी। सरस्वती के दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। मिट्ठू सपेरा ने सात मटके एक साथ सिर पर रखकर बबाई नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया। इसके साथ उनके द्वारा मजीरे बजाकर की गई आरती से पूरा परिसर तालियां बजाने को मजबूर हो गया। उनके द्वारा मटके सिर पर रखकर एक थाली पर चलने का नृत्य देख लोग रोमांचित हो उठे। आरती सपेरा द्वारा शरीर की भिन्न-भिन्न मुद्राएं बनाकर सर्प की तरह कालबेलिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई। उनके द्वारा अपने शरीर को उलटा घुमाकर जमीन पर रखे सौ रुपए के नोट को मुंह से उठाने की कला देख लोग मंत्रमुग्ध हो गए। जब उनके द्वारा जमीन पर रखी दो अंगूठियों को शरीर मोड़कर आंखों से भीच कर उठाया गया, यह दृश्य देख लोग सिहर उठे।

कलाकारों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की चेयरमैन विभारानी सक्सेना, प्रिंसीपल अलका गुप्ता, नेहा सक्सेना व डेजी ने कलाकार आरती सपेरा व मिट्ठू सपेरा को शाल उढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया, जबकि ग्रुप लीडर सुरमनाथ व उनके अन्य सहयोगी कलाकारों को डायरेक्टर डॉ.आत्माराम शर्मा, प्रिंसीपल संदीप वर्मा, जेएसआईटीएम के प्राचार्य आलोक पांडेय ने शाल उढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। प्रबंधक हिमांशू सक्सेना ने सभी कलाकारों का आभार व्यक्त किया।

दुर्लभतम लुप्त प्राय: की श्रेणी में हैं कालबेलिया और बबाई नृत्य

राजस्थान के जोधपुर से आए ग्रुप लीडर सुरमनाथ ने बताया कि कालबेलिया और बबाई नृत्य सपेरों का पारंपरिक प्राचीनतम नृत्य है। उन्होंने इसके संबंध में बताया कि यूनेस्को द्वारा वर्ष 2010 में कालबेलिया और बबाई नृत्य कला को दुर्लभतम तथा लुप्त प्राय: की श्रेणी में रखा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले लोगों को पानी की किल्लत रहती थी। जिसकी वजह से घर की महिलाएं करीब 15 किलोमीटर प्रतिदिन चलकर कई-कई मटके एक साथ पानी से भरकर लाती थीं। आज भी अत्यंत ग्रामीण इलाकों में राजस्थानी महिलाएं इसी तरह से सात-आठ मटके ढो रही हैं। बबाई नृत्य का यही आधार है। उन्होंने कालबेलिया नृत्य के संबंध में बताया कि यह नृत्य मुख्यता घूमकर जनजाति का नृत्य है। इस जाति के लोग प्राचीनकाल से ही सांप नचाकर जीविकोपार्जन किया करते थे। परंतु सांप पकड़ने पर सरकार की पाबंदी के बाद से महिलाओं व बच्चों को सर्प की तरह नृत्य करने की शिक्षा दी गई।

epaper
सब्सक्राइब करें हिन्दुस्तान का डेली न्यूज़लेटर

संबंधित खबरें