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फीकी पड़ी तरबूज की मिठास, दाम न मिलने से किसान परेशान

हिन्दुस्तान टीम,कन्नौजPublished By: Newswrap
Fri, 04 Jun 2021 03:52 AM
फीकी पड़ी तरबूज की मिठास, दाम न मिलने से किसान परेशान

गुगरापुर। रामजी तिवारी

गुगरापुर ब्लॉक के गंगा किनारे में बड़े पैमाने पर होने वाली तरबूज की खेती इस बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। इस बार फसल न तो लोकल की मंडियों में पहुंच सकी, नहीं बाहर मंडियों में ही जा सका। इससे किसानों पसोपेश में हैं। उनकी मेहनत का मुआवजा नहीं मिल सका है।

तरबूज की खेती पिछले वर्ष तक किसानों के लिए लाभदायक साबित होती रही है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते पिछले महीने लगे कोरोना लॉकडाउन से सप्लाई बाहर नहीं जासकी। इससे मुनाफा तो दूर किसानों को लागत तक निकलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। गंगा की कटरी में तरबूज की फसल करने वाले किसानों से बात की गई उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि भले ही अब आंशकि लॉकडाउन खुल गया है, लेकिन कई बड़े शहरों में अब भी पाबंदी जारी है। इससे गैर जनपदों व्यापारियों के न आने के कारण इस बार तरबूज बाहर नहीं जा पा रहा। ऐसी ही हालत रही तो तरबूत की फसल खेत में ही खराब हो जाएगी।

कटरी में होती कई वैरायटी की तरबूज की फसल

गंगा की कटरी में तैयार माधुरी, 95, शक्ति, मधुबाला किस्म के तरबूजों की पैदावार की जाती है। किसानों का कहना है कि तरबूज बिक्री के लिए मथुरा, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली के आजाद नगर, आगरा आदि में बिक्री के लिए व्यापारी ले जाते हैं, लेकिन इस बार अभी तक लॉकडाउन के चलते व्यापारी नहीं आ पा रहे हैं, जबकि तरबूजों की पैदावार इस बार अच्छी हुई है।

तरबूज में लगती है लागत ज्यादा

किसान बताते हैं कि तरबूज की फसल तैयार करने में लागत भी ज्यादा लगती है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार बीज के दाम भी बढ़े हैं। साथ ही डीएपी, कंपोस्ट व अन्य मिनिरल्स डालकर गड्ढा बनाया जाता है। इसमें लागत ज्यादा लग जाती है। यदि तरबूज बाहर के मंडियों में न जा सका तो लागत भी डूब जाएगी।

चार से सात रुपए किलो ही रह गई कीमत

किसानों की मानं तो तरबूज की पहली फसल का दाम पिछले वर्ष खेत में ही 12 से 13 रुपए तक मिला था। लेकिन इस बार वयापारियों के आने से दाम कम होकर चार से सात रुपए किलो तक ही रह गया है। ट्रॉली लोड कर बेचने पर 11 से 12 हजार तक मिलते थे, पर इस बार फसल तैयार होने के बाद भी कोई ट्रॉली खरीदने को तैयार नहीं है।

किसानों की परेशानी, उनकी ही जुबानी

व्यापारी इलियास खां का कहना है कि कटरी क्षेत्र में लागत लगाने व मेहनत करने के बाद जानवरों से फसल को बचाने के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ता है। तब फसल तैयार हो पाती है। लेकिन लॉकडाउन में फल मंडियों तक नहीं पहंुचा, इससे कीमत पर असर पड़ा है।

महमूंदापुर निवासी किसान का कहना है कि पैसा और मेहनत लगा कर बड़ी मुश्किल से तरबूज की फसल को तैयार किया गया। तरबूज की फसल की बिक्री न हो सकने के कारण काफी नुकसान हुआ। लगता है इस बार लागत भी जेब से ही जाएगी।

गांव सराय निवासी किसान अशोक कुमार का कहना है कि खेतों में फसल पूरी तरीके से तैयार हो चुकी है और तुड़ाई भी चल रही है। इस फसल को निश्चित अवधि में ही तोड़ना पड़ता है। इसे रोका नहीं जा सकता। बाहर से डिमांड न आने से लोडिंग नहीं हो पा रही है।

गांव गोरी बांगर निवासी किसान श्रीकिशन दिवाकर का कहना है की पिछला पूरा महीना लॉकडाउन रहा। लोग घरों में कैद रहे, जिसकी वजह से तरबूज तैयार होने के बाद भी लोगों की पहुंच से दूर रहा। इस बार हालात बेहतर नहीं हैं। घाटा होना तय दिख रहा है।

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