
सत्संग से मिलता मन को सही दिशा, जीवन में प्यार
संक्षेप: Kannauj News - छिबरामऊ में संत निरंकारी सत्संग भवन में महात्मा राजकुमार गुप्ताजी ने सत्संग में कहा कि अहंता को मिटाकर ही निराकार प्रभु को पाया जा सकता है। उन्होंने प्रेम और साध-संगत के महत्व को बताया और कहा कि बिना प्रेम जीवन निरर्थक हो जाता है। धर्म में प्रेम, नम्रता और करुणा का संदेश है।
छिबरामऊ, संवाददाता। नगर के पूर्वी बाईपास पर संत निरंकारी सत्संग भवन, में आयोजित सत्संग में परम पूज्य महात्मा राजकुमार गुप्ताजी ने सत्संग में कहा कि जो मानव अपनी अहंता को मिटा देता है, वही निराकार प्रभु को पा सकता है। उन्होंने कहा कि बिना प्रभु के प्रेम के साध-संगत से प्रेम संभव नहीं, और बिना साध-संगत के प्रेम के कोई मनुष्य से प्रेम नहीं कर सकता। प्रेम के बिना जीवन निरर्थक हो जाता है। मन बुराई की ओर अग्रसर होता है। सत्संग मन को सही दिशा देता है। जिससे लोक सुखी और परलोक सुहेला होता है। महात्मा गुप्ताजी ने कहा कि आज का मनुष्य कर्मकांडों में उलझकर अज्ञानता में नफरत के बीज बो रहा है।

जिससे वह स्वयं का नुकसान कर रहा है। गुरुओं, पीरों और पैगंबरों का नाम लेकर धर्म को हानि पहुंचाने वाले नहीं जानते कि सभी धर्म प्रेम, नम्रता, करुणा और दया का संदेश देते हैं। आध्यात्मिकता से ही धर्म मजबूत होता है। उन्होंने समागम का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें देश-विदेश से विभिन्न धर्मों के लोग एकत्र होते हैं, परंतु मानवता के धर्म के तहत एकजुट होकर गुरु का गुणगान करते हैं। समागम में कोई भेदभाव नहीं होता, सब मिलकर प्रभु का आशीर्वाद लेते हैं, गम भूलकर जीवन को सुखमय बनाते हैं। यही सत्संग और समागम की सार्थकता है।

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