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लोकसभा के लिए सपा की मोर्चेबंदी, धमेंद्र यादव को बनाया प्रभारी

- सपा की तीसरी लिस्ट में पूर्व सांसद धमेंद्र यादव को कन्नौज व आजमगढ़ का बनाया गया प्रभारी - पूर्व सांसद धमेंद्र यादव को प्रभारी बनाने के सियासी...

लोकसभा के लिए सपा की मोर्चेबंदी, धमेंद्र यादव को बनाया प्रभारी
हिन्दुस्तान टीम,कन्नौजTue, 20 Feb 2024 08:45 PM
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- सपा की तीसरी लिस्ट में पूर्व सांसद धमेंद्र यादव को कन्नौज व आजमगढ़ का बनाया गया प्रभारी

- पूर्व सांसद धमेंद्र यादव को प्रभारी बनाने के सियासी गलियारों में निकाले जा रहे अलग- अलग मायने

कन्नौज,संवाददाता। लोकसभा क्षेत्र कन्नौज इस बार फिर वीवीआईपी सीटों में शुमार होने वाला है। जनता भी इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रही है कि कब सियासीदल अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे। हालांकि इस बार फिर कन्नौज लोकसभा क्षेत्र का मुकाबला बेहद रोचक होगा। मंगलवार की शाम को जारी हुई लिस्ट में सपा ने अभी स्पष्ट तौर पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि कन्नौज लोकसभा सीट की मानीटरिंग व संगठन को चुस्त-दुरुस्त बनाए जाने के लिए पूर्व सांसद धमेंद्र यादव को कन्नौज लोकसभा का प्रभारी घोषित कर दिया गया है।

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा प्रत्याशियों के साथ ही कुछ जिलों के प्रभारियों की तीसरी लिस्ट देर शाम जारी कर दी। इस लिस्ट में पूर्व सांसद धमेंद्र यादव को कन्नौज का प्रभारी बनाया गया है। हालांकि सपा ने अभी तक कन्नौज लोकसभा सीट को लेकर पूरी तरह से अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जबकि सपा के कुछ वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष के कन्नौज से ही लड़े जाने का दंभ भर रहे हैं। उनका कहना कि पार्टी तेजी के साथ चुनाव की तैयारियों में जुटी है। कन्नौज की जनता को भी इस बार चिर परिचित चेहरों के बीच होने वाले चुनाव को लेकर इंतजार है। मौजूदा समय में सांसद सुब्रत पाठक पहले भी दो बार सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। तब उनको हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अपनी हार का बदला सपा सुप्रीमो की पत्नी डिंपल यादव को वर्ष 2019 के चुनाव में हराकर लिया। इस बार कौन से चेहरे आमने सामने होंगे फिलहाल इसको लेकर कयासों का दौर चल रहा है। सपा पुराना हिसाब बराबर करने और खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने को लेकर जनता के बीच पसीना बहा रही है तो भाजपा एक बार फिर कन्नौज लोकसभा में भगवा फहराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए है। हालांकि इस बार चुनाव में तस्वीर क्या होगी यह आने वाला वक्त बताएगा। पिछले चुनावों में अखिलेश यादव जब यहां से सांसद चुनकर जाते थे तो वह सूबे के मुख्यमंत्री नहीं बने थे तब वह सपा सुप्रीमो के बेटे और सपा नेता के तौर पर चुनाव लड़ते थे। इस बार वह प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं। कई बार इशारों में ही उन्होने यहां से चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। वहीं मौजूदा सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री के बीच अक्सर जुबानी जंग भी देखने को मिली है। हाल के कुछ महीनों में सपा मुखिया की कन्नौज में बढ़ी सक्रियता भी बहुत कुछ बयां कर रही है। कुछ भी हो इस बार का चुनाव काफी रोचक होने वाला है। अभी यह खुले तौर पर तय नहीं है कि सपा कन्नौज से किसे मैदान में उतारने वाली है । लेकिन इसबार होने वाले सियासी मुकाबले को लेकर जनता के बीच में भी खासा उत्साह है।

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