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मेडिकल कॉलेज में शोपीस बनी हैं 10 करोड़ की मशीन

राजकीय मेडिकल कॉलेज में करोड़ों की लागत से लगाई गई सीटी स्कैन व एमआरआई की मशीने सफेद हाथी बनकर मेडिकल कॉलेज की शोभा बढ़ा रही है। सीटी स्कैन व एमआरआई होने के बाद भी मरीज दूसरी जगह दोेनों जांच दोबारा करवाने पर मजबूर हो जाता है। रेडियोलॉजिस्ट ना होने के कारण जांच की रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीटी स्कैन की फिल्म ना मिलने से मोबाइल में ही फिल्म खीचकर डॉक्टरों को दिखानी पड़ती है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज में जरूरतमंदों के इलाज के लिए सरकार ने 10 करोड़ की लागत से सीटी स्कैन व एमआरआई की मशीन लगावाई थी। जिससे यहां के गरीब मरीजों को बाहर ना जाना पड़े। लेकिन मेडिकल कॉलेज सीटी व एमआरआई की मशीने मेडिकल कॉलेज की शोभा बढ़ा रही है। दिसम्बर 2016 में दोनों मशीनों की स्थापना की गई थी। जिसके लिए कम्पनी के टेक्नेशियन ने मशीनों को चलाने की शुरआत कर दी थी। लेकिन एक साल बाद कम्पनी के सहमति पर एमआरआई के टेक्नेशियन विवेक कुमार व सीटी स्कैन के योगेन्द्र सिंह को आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति कर दी गई थी। जब से आज तक दोनों टेक्नेशियन अपनी-अपनी मशीनों पर कार्य कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक से लगाई गई मशीनों की गुणवत्ता अपने आप में एक गवाह बनी हुई है, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी सीटी स्कैन व एमआरआई में अभी भी फिल्म नहीं उपलब्ध कराई जाती है। जिससे उच्चतम तकनीक से लगाई गई मशीनों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सिर में चोट आने पर सीटी स्कैन व एमआरआई की होती जरूरी

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर अधिकतर दुर्घटनाओं में सिर में चोटें आती हैं। वहीं अन्य वाहनों के दुर्घटनाओं में सिर में चोटें आ जाती हैं। जिनको सीटीस्कैन के जांच की जरूरत पड़ती है। जिससे मरीज को उसका उपचार मिल सके। लेकिन जांच के बाद रिपोर्ट ना मिलने के कारण अक्सर ऐसे मरीजों को कानपुर रेफर कर दिया जाता है।

नहीं है रेडियोलॉजिस्ट

राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो साल बीत जाने के बाद भी अभी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी है। जिससे उच्चतर तकनीक से लगाई गई आधुनिक सीटी व एमआरआई की मशीनें महत्वहीन साबित हो रही हैं।

रेडियोलॉजिस्ट होते तो सैकड़ों की बचती जान

राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक अदद रेडियोलॉजिस्ट ना होने के कारण मरीजों को समय रहते इलाज नहीं मिल पाता है। जिससे वह काल के गाल में समा जाते हैं। सिर में चोट आने के कारण उनको तुरन्त ऑपरेशन या उपयुक्त इलाज आवश्यकता होती है। लेकिन मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट ना होने के कारण उनको रेफर कर दिया जाता है। जिससे मरीज दूसरे अस्पताल में जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट के लिए कई बार शासन से पत्र व्यवहार किया जा चुका है। लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की प्रदेश में भारी कमी के कारण नियुक्ति नहीं हो पा रही है। फिर भी सीटी स्कैन में फिल्म रिपोर्ट की प्रकिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी।

डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज

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  • Web Title: Showcases are made in medical colleges of 10 million machines