
हाड़कंपाऊ ठंड और अव्यवस्थाओं से सुस्त पड़ी सरकारी धान खरीद
Kannauj News - कन्नौज जिले में कड़ाके की ठंड, शीतलहर और घने कोहरे ने सरकारी धान खरीद व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। किसानों की संख्या में कमी और खरीद केंद्रों की अव्यवस्थाओं के कारण केवल 41.38 प्रतिशत धान ही खरीदी जा सकी है। किसान मजबूरी में प्राइवेट आढ़तियों को कम दामों पर धान बेचने को विवश हैं।
कन्नौज,संवाददाता। जिले में पड़ रही हाड़कंपाऊ ठंड, शीतलहर और घने कोहरे ने सरकारी धान खरीद व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मौसम की मार और खरीद केंद्रों पर मौजूद अव्यवस्थाओं के कारण किसान केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। नतीजतन सरकारी खरीद लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है और किसान मजबूरी में प्राइवेट आढ़तियों को कम दामों पर धान बेचने को विवश हैं। जिले में धान खरीद के लिए कुल 22 क्रय केंद्र संचालित हैं, जिनमें खाद्य विभाग के 16, पीसीएफ के 5 और एफसीआई का एक केंद्र शामिल है। इसके बावजूद अब तक सिर्फ 12,414 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो सकी है, जबकि जिले का लक्ष्य 30,000 मीट्रिक टन रखा गया है।
यानी लक्ष्य के सापेक्ष केवल 41.38 प्रतिशत खरीद ही पूरी हो पाई है। धान बिक्री के लिए 3,067 किसानों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन इनमें से मात्र 1,628 किसान ही अब तक केंद्रों तक पहुंच सके हैं। छिबरामऊ के निगम मंडी स्थित खरीद केंद्र प्रभारी कृष्णगोपाल गौतम के अनुसार, कड़ाके की ठंड और कोहरे के चलते किसान केंद्रों पर आने से बच रहे हैं। यहां अब तक 146 किसानों से 11,384 क्विंटल धान की खरीद हुई है। साथ ही 19 किसानों से 981 क्विंटल बाजरा और 14 किसानों से 595 क्विंटल मक्का भी खरीदा गया है। इसके बावजूद रोजाना खरीद की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। सफाई के नाम पर धान का 30 से 40 प्रतिशत तक हिस्सा उड़ जाता तिर्वा मंडी समिति में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां सरकारी धान खरीद केंद्र पर सफाई के लिए मात्र एक मशीन उपलब्ध है, जिससे दिन में एक-दो किसानों की ही तौल हो पाती है। किसानों का आरोप है कि सफाई के नाम पर उनकी धान का 30 से 40 प्रतिशत तक हिस्सा उड़ जाता है। इससे परेशान होकर किसान सरकारी केंद्र छोड़कर आढ़तियों के यहां धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं, जहां 1600 से 1700 रुपये प्रति कुंतल के भाव मिल रहे हैं। जबकि सरकारी समर्थन मूल्य कामन धान के लिए 2309 रुपये और ग्रेड-ए के लिए 2389 रुपये प्रति कुंतल तय है। किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्रों पर प्रक्रिया धीमी है, कटौती अधिक है और भुगतान में भी समय लगता है। दूसरी ओर प्राइवेट व्यापारियों के यहां तुरंत भुगतान और कम झंझट के कारण धान बेचना आसान हो जाता है। कुल मिलाकर, कड़ाके की ठंड, कोहरा और केंद्रों पर अव्यवस्थाएं मिलकर सरकारी धान खरीद की रफ्तार पर ब्रेक लगाए हुए हैं। यदि जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हुईं तो लक्ष्य हासिल करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। कोट जिला खाद्य विपणन अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि किसानों को साफ-सुथरा धान लाने के निर्देश हैं, लेकिन मौसम और व्यवस्थागत समस्याओं के चलते खरीद प्रभावित हो रही है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




