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4 जून, 2020|7:32|IST

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ग्रामीण इलाकों में परचून की दुकानों पर सख्ती का असर नहीं

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लॉकडाउन के तहत शहरी इलाकों में तो सख्ती की जा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी अफसरों की निगाह नहीं पहुंची है। वहां छोटे-छोटे दुकानदार भी तरह-तरह का बहाना बनाकर कीमत वसूलने में मनमानी कर रहे हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वालों को परेशानी हो रही है।

सोमवार को जिला मुख्यालय से लगे मुख्य मार्गों के निकट बसे गांवों में दैनिक वस्तुओं की खाद्य सामग्री की दिक्कत दिखी। खरीदारों का कहना है कि महंगे दामों में बिक्री हो रही है। सदर तहसील के मानीमऊ और उसके आसपास के गांव उदैतापुर, नेरा आदि के लोगों की शिकायत है कि उन्हें परचून की दुकानों में चीजें महंगी मिल रही हैं। शक्कर को लेकर ज्यादा शिकायत मिली। लोगों ने कहा कि यहां 55 से 60 रुपए किलो शक्कर मिल रही है। सरसों का तेल भी डेढ़गुना कीमत पर बिक रहा है। सवाल करने पर दुकानदारों का जवाब होता है कि वह खुद ही महंगा लेकर आए हैं। न लेना हो तो शहर से खरीदो। यही नहीं नहाने और कपड़ा धोने का साबुन भी पिं्रट रेट से ज्यादा कीमत पर मिल रहा है। हालांकि उदैतापुर में प्राइमरी स्कूल के पास की परचून के सामान की गुमटी रखी थी। वहां दुकानदार ने आरोपों को गलत बताया। कहा जो शिकायत कर रहा है, उसे सामने लाओ।

सब्जी में शिकायत नहीं, बेचने वाले ही परेशान

तहसील सदर में करीब 450 पास यहां से ही जारी हुए हैं। जिला मुख्यालय से करीब छह किमी दूर सोमवार को दोपहर करीब एक बजे उदैतापुर से मानीमऊ की ओर सब्जियों की ठेली ले जा रहे अकील ने बताया कि हर रोज व तीन-चार गांव में सब्जियों की बिक्री करने जाते हैं। अधिकारियों ने पास खूब बना दिए, जिससे एक-एक गांव में तीन-तीन ठेली तक पहुंच रही हैं। सब्जियों के महंगे होने की बात पर वह कहते हैं कि वह तो सस्ती बेच रहे हैं, कोई भी ले ले। अकील ने बताया कि प्याज 30 रुपए व टमाटर 20 रुपए में ही बिक्री कर रहे हैं। आगे बढ़ने पर मुख्य मार्ग स्थित एक पेड़ की छांव के नीचे फल विक्रेता आराम कर रहा था। कोई भी खरीदार नहीं दिखा।

फल की ठेली रोकी, फिर खरीदे

सुल्तनापुर गांव में फल की ठेली लेकर गुजरे युवक को कुछ ग्रामीणों ने रोका और फलों के रेट लिए। विक्रेता ने संतरा 40 व अंगूर 60 रुपए प्रति किलो बताए। निकट खड़े एक ग्रामीण ने एक किलो संतरा व 250 ग्राम अंगूर भी खरीदे। गुखरू गांव में एक पक्के मकान के बाहर सब्जी की ठेली लगी थी। वहां खड़े युवक से पूछा कि कैसी है बिक्री तो बताया सन्नाटा है भैया। पूछा महंगी बेच रहे इसलिए तो नहीं। खिड़की से झांक रहीं महिलाएं बोली, इनकी सब्जी तो बिक गई है। दोपहर की वजह से सन्नाटा है। बची हुई सब्जियां शाम को खत्म हो जाएंगी।

प्रशासन से नहीं कोई मदद

उदैतापुर गांव में लोगों ने कहा कि यहां मदद के लिए प्रशासन से कोई नहीं आया है। यहां कई जरूरतमंद हैं, जिन्हें अफसरों को मदद करनी चाहिए। लेकिन अब तक किसी तरह की मदद नहीं पहुंची है।

लॉकडाउन में क्या बोले ग्रामीण

गुखरू निवासी सेवाराम ने बताया कि परचून के सामान पर अधिक महंगाई है। सरसों का तेल जो 100-110 रुपए किलो मिलता रहा, दुकानदार अब 150 रुपए किलो दे रहे हैं।

ब्लॉक कन्नौज क्षेत्र के गुखरू निवासी मुकेश चंद्र ने बताया कि ठेली पर बिक रही साग-सब्जी भी महंगी हो गई है। हालांकि गांव में मिल जाती है, बाहर नहीं जाना पड़ता।

सुल्तनापुर निवासी विमल कुमार ने बताया कि चीनी का रेट 38-40 रुपए प्रति किलो था, लेकिन अब यहां या नेरा गांव की दुकान पर खरीदो 60 रुपए में ही दी जा रही है।

आवश्यक वस्तुओं के मूल्य छू रहे आसमान

छिबरामऊ/सौरिख।लॉक डाउन को लेकर नगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों ने आम जरूरत की वस्तुओं के दाम में बेहताशा वृद्धि कर दी है। जो अब आम आदमी के लिए परेशानी का सबब बनने लगी है। लोगों ने स्थानीय प्रशासन से आम जरूरत से जुड़ी खासतौर पर किराना व्यापारियों पर बड़े हुए रेट पर अंकुश लगाने की गुहार लगाई है।

आवश्यक वस्तुएं अधिक मूल्यों पर बेची जा रही है, जिससे आम जनमानस परेशान दिख रहा है। पुलिस प्रशासन के डर से दुकानदार तड़के सुबह दुकानें खोलकर आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई अधिक दामों में कर रहे हैं। बेबस व्यक्ति मजबूर होकर बढ़े हुए दामों में आम जरूरत की वस्तुएं खरीदने को मजबूर है। विरोध करने पर दुकानदार वस्तु देने से ही मना कर देता है।

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  • Web Title:No strict effect on groceries in rural areas