मुंबई अंडरवर्ल्ड की कहानियों से दुष्प्रेरित हो अपराध की ओर बढ़ाता गया कदम
कन्नौज के मैनूर की कहानी यह दर्शाती है कि अपराध की राह विनाश की ओर ले जाती है। 27 वर्षीय मैनूर, जो मुंबई से लौटकर गांव आया था, जल्दी पैसे कमाने की चाह में मासूम बच्चे का अपहरण करता है। उसका अंत हरदोई पुलिस के एनकाउंटर में होता है, जिससे गांव में सन्नाटा है।

कन्नौज। ठठिया क्षेत्र के मैनूर की कहानी एक बार फिर यह साबित करती है कि अपराध की राह आखिरकार विनाश की ओर ही ले जाती है। गांव में सामान्य और शांत स्वभाव का दिखने वाला मैनूर अंदर ही अंदर तेज़ी से पैसा कमाने और अपराध की दुनिया में पहचान बनाने की ख्वाहिश पाल चुका था।
मैनूर का अतीत
स्थानीय लोगों ने बताया कि 27 वर्षीय मैनूर का अधिकांश समय मुंबई में बीता। करीब 12 साल पहले उसका बड़ा भाई महनूश उसे अपने साथ मुंबई ले गया था, जहां शुरुआत में वह ऑटो की धुलाई का काम करता था। बाद में उसने खुद ऑटो चलाना शुरू कर दिया। करीब एक महीने पहले ही वह मुंबई से अपने गांव रुरा लौटा था। वह अक्सर मुंबई में रहता था और वहीं से प्रभावित होकर अंडरवर्ल्ड की कहानियां सुनाता था। इन किस्सों में वह अपराधियों की जिंदगी को आकर्षक तरीके से पेश करता, जिससे उसके मन में भी वैसा ही जीवन जीने की चाह पैदा होती गई। यही सोच धीरे-धीरे उसे गलत रास्ते पर ले गई।
गलत रास्ते पर चलना
गांव में उसका दायरा सीमित था, लेकिन जिन युवकों से वह मिलता, उनके बीच वह जल्दी अमीर बनने के तरीके और अपराध के जरिए पहचान बनाने की बातें करता था। यह मानसिकता ही आगे चलकर उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। जल्द पैसे कमाने की लालच में उसने मासूम बच्चे के अपहरण जैसा जघन्य अपराध कर डाला, जिसने न केवल एक परिवार को तबाह किया बल्कि खुद उसकी जिंदगी भी खत्म कर दी। हरदोई पुलिस के एनकाउंटर में उसका अंत हो गया। घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। लोग खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन भीतर ही भीतर यह चर्चा जरूर है कि अगर समय रहते उसने सही राह चुनी होती, तो आज उसका अंजाम कुछ और हो सकता था।
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