चकबंदी प्रक्रिया में गड़बड़ी से रवि की फसल बर्बाद, किसान परेशान
Kannauj News - जलालाबाद में चकबंदी प्रक्रिया के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसान अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा। मंत्री असीम अरुण ने किसानों को आश्वस्त किया है कि चकबंदी प्रक्रिया को रद्द किया जाएगा। किसानों की उम्मीदें अब मंत्री के आश्वासन पर टिकी हैं।

जलालाबाद। क्षेत्र में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका के चलते किसान की रवि की फसल बर्बाद होने लगी है। किसान लगातार खेतों में पहुंच नहीं पा रहे वल्कि अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए परिक्रमा लगा रहे हैं। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस समाधान न मिलने से किसानों चिंता बढ़ गई है। किसानसें का कहना है कि चकबंदी की वजह से खेतों में समय पर सिंचाई और देखभाल नहीं हो पा रही, जिसके चलते खड़ी फसल खराब होती जा रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई न होने से किसान बेहद आक्रोशित है।
किसान ब्रजनंदन वर्मा,मीना देवी,राजू वर्मा,अनिल द्विवेदी,बृजेश कुमार,ने बताया कि वह कई बार चकबंदी अधिकारियों के पास गए, तहसील से लेकर जिला स्तर तक गुहार लगाई, लेकिन सभी ने सिर्फ आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। किसानों की मानें तो चकबंदी की प्रक्रिया थोपे जाने से खेतों की व्यवस्था बिगड़ गयी है। खेतों पर पहुंच न पाने की वजह से फसल की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। इस बीच फसल बचाने की उसकी सारी कोशिशें विफल होती दिख रही हैं। हालांकि गुरुवार देर रात किसानों ने सदर विधायक एवं समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण से मुलाकात की और अपनी समस्या से अवगत कराया। मुलाकात के दौरान मंत्री असीम अरुण ने किसानों को आश्वस्त किया कि चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त करने की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने किसानों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और कहा कि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान प्रशासन के माध्यम से कराया जाएगा। मंत्री ने किसानों से यह भी कहा कि वे किसी भी तरह का ऐसा कदम न उठाएं जिससे उनकी स्वयं की या प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान अब मंत्री के आश्वासन के बाद उम्मीद लगाए बैठे हैं कि चकबंदी प्रक्रिया रद्द होने पर उनकी फसल और खेत बच सकेंगे। फिलहाल, वे अपने खेतों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और प्रशासन से शीघ्र उचित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
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