Hindi NewsUttar-pradesh NewsKannauj NewsFarmers in Sardamai Receive Land Records After 35 Years Bring Joy to the Village
35 साल बाद मिले भू-अभिलेख मिले तो सरदामई के किसानों के खिले चेहरे

35 साल बाद मिले भू-अभिलेख मिले तो सरदामई के किसानों के खिले चेहरे

संक्षेप:

Kannauj News - कन्नौज के छिबरामऊ के ग्राम सरदामई में 35 वर्षों के बाद 200 किसानों को भू-अभिलेख मिले। आगजनी में नष्ट हुए अभिलेखों के पुनः निर्माण के बाद, किसानों के चेहरे खिल उठे और गांव में खुशी का माहौल बना। अब किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।

Dec 05, 2025 10:24 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कन्नौज
share Share
Follow Us on

कन्नौज। छिबरामऊ के ग्राम सरदामई में शुक्रवार को 35 वर्ष बाद किसानों को उनके भू-अभिलेख प्राप्त हुए। 200 किसानों को आधार अभिलेख मिलने के बाद गांव में खुशी का माहौल छा गया। लंबे इंतज़ार और वर्षों की जटिल प्रक्रिया के बाद अपने दस्तावेज हाथों में लेकर किसानों के चेहरे खिल उठे। सरदामई में चकबंदी की प्रक्रिया के बाद 1987 में कब्जा परिवर्तन भी कर दिया गया, लेकिन 1990 में हुए अग्निकांड में गांव के सभी मूल राजस्व अभिलेख जलकर नष्ट हो गए। इससे चकबंदी की प्रक्रिया गंभीर रूप से बाधित हुई और अंततः 28 जनवरी 2009 को यह प्रक्रिया निरस्त कर दी गई।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

काफी वर्षों तक ठप पड़ी चकबंदी को 23 सितंबर 2016 को दोबारा शुरू किया गया। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के नेतृत्व में लगातार प्रयास किए गए और अंततः 26 सितंबर 2023 को पूर्व की कार्यवाहियों को निरस्त करते हुए वर्ष 1980 की व्यवस्था को पुनः बहाल किया गया। 1990 की आग में जले कुल 35 ग्रामों में से पहले ही कृनन्दलालपुर, करनौली, उसमानपुर और कठिगराकृ के आधार अभिलेख तैयार किए जा चुके थे। अब सरदामई भी इस सूची में शामिल हो गया है। उप संचालक चकबंदी विजय कुमार मिश्र तथा बंदोबस्त अधिकारी/डिप्टी कलेक्टर अविनाश कुमार गौतम के मार्गदर्शन में सरदामई के आधार अभिलेख सफलतापूर्वक तैयार किए गए। शुक्रवार को गांव के 200 किसानों को भू-अभिलेख वितरित किए गए। अभिलेख वितरण के दौरान डिप्टी कलेक्टर ने कहा कि इन दस्तावेजों के मिलने से किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ अब मिलना शुरू होगा। उन्होंने यह भी बताया कि शेष ग्रामों में आधार अभिलेख तैयार कराने की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है और जल्द ही अन्य किसानों को भी इसका फायदा मिलेगा। कई दशकों के इंतज़ार के बाद किसानों को मिले भू-अभिलेखों ने गांव में नए उत्साह और उम्मीद की किरण जगा दी है।