
आलू की फसल पर लेट ब्लाइट का खतरा, किसानों की चिंता बढ़ी
Kannauj News - क्षेत्र में मौसम का बदलता मिजाज इन दिनों किसानों के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। लगातार गिरता तापमान, घना कोहरा और वातावरण में बढ़ती नमी के कारण आलू की
छिबरामऊ, संवाददाता। कोहरा अधिक दिनों तक रहने से मटर में सफेद चूर्ण रोग और आलू में झुलसा रोग लगने की संभावना होती है। कोहरे का और भी बहुत सारे नुकसान हैं। खेतों में रोगग्रस्त पत्तियां और झुलसे हुए पौधों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। जिससे किसानों की चिंताएं गहरा गई हैं। स्थानीय किसान रामू चौहान ने बताया कि उनकी आलू की फसल में झुलसा (ब्लाइट) रोग लगना शुरू हो गया है। यदि समय पर दवा का छिड़काव नहीं किया गया तो भारी नुकसान की आशंका है। कई अन्य किसानों ने भी इसी तरह की शिकायत की है।
ठंड और नमी के कारण फसल की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं और पौधे कमजोर हो रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है। जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने बताया कि इस समय आलू की फसल में लेट ब्लाइट रोग का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। नमी और कम तापमान के कारण पत्तियों पर पहले पानी जैसे धब्बे बनते हैं जो बाद में भूरे-काले पड़ जाते हैं। यह रोग बहुत तेजी से फैलता है और खेत के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है। बचाव के लिए अधिकारी ने सुझाव दिया कि मैन्कोजेब और मेटालेक्सिल आधारित कीटनाशक दवाओं का छिड़काव तुरंत करें। 8-10 दिन बाद कॉपर आधारित दवा का दोबारा उपयोग करें। साथ ही खेत में पानी नहीं रुकने दें और हवा का उचित संचार बनाए रखें। विभाग ने किसानों से अपील की है कि रोग की शुरुआती पहचान कर तत्काल उपाय करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। किसान अब विभाग की सलाह पर अमल करने में जुट गए हैं। लेकिन मौसम की अनिश्चितता के बीच उनकी चिंता बरकरार है।

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