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चाईनीज मांझे से सिर्फ पतंग नहीं जीवन की डोर भी खतरे में

चाईनीज मांझे से सिर्फ पतंग नहीं जीवन की डोर भी खतरे में

संक्षेप:

Kannauj News - कन्नौज में पतंगबाजी के मौसम में चाइनीज मांझा लोगों और पक्षियों के लिए खतरा बन गया है। इसकी बिक्री पर रोक के बावजूद चोरी-छिपे इसका इस्तेमाल हो रहा है। कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोग और पक्षी घायल हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मांझा नायलॉन, कांच और धातु के कणों से बना है, जो बेहद खतरनाक है।

Feb 06, 2026 11:10 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कन्नौज
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कन्नौज,संवाददाता। पतंगबाजी का मौसम आते ही आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। छतों पर बच्चों की खिलखिलाहट और गलियों में पतंगबाजों की आवाजाही आम हो जाती है, लेकिन इसी खुशियों के बीच चाइनीज मांझा मौत का सामान बनकर लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। मजबूती और धार के चलते यह मांझा पतंग उड़ाने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है, मगर इसकी कीमत आम लोगों और बेजुबान पक्षियों को चुकानी पड़ रही है। सरकार और प्रशासन द्वारा चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक के आदेश जारी किए जा चुके हैं। यहां तक कि इससे किसी की मौत होने पर हत्या का मामला दर्ज करने के निर्देश भी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कन्नौज के नखास बाजार, सब्जी मंडी रोड, सरायमीरा, छिबरामऊ रोड और रेलवे रोड जैसे इलाकों में चोरी-छिपे इसकी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।

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कई दुकानदार इसे प्लास्टिक धागा या स्पेशल मांझा कहकर ग्राहकों को थमा देते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक त्योहारों के दिनों में पुलिस की सख्ती थोड़ी बढ़ती है, लेकिन उसके बाद फिर से पुराने ढर्रे पर बिक्री शुरू हो जाती है। बच्चों और किशोरों के बीच पतंग काटने की प्रतिस्पर्धा इतनी तेज हो चुकी है कि देसी सूती मांझे को कमजोर माना जाने लगा है। नतीजतन, खतरनाक चाइनीज मांझा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सड़क पर चलना भी बन रहा जोखिम शहर की मुख्य सड़कों और मोहल्लों की गलियों में उड़ते मांझे का खतरा लगातार बना रहता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है। कई बार कटकर आई पतंगों का मांझा हवा में लहराता हुआ सड़क तक पहुंच जाता है। अचानक गर्दन, चेहरे या हाथ से टकराने पर गहरी चोट लग सकती है। हाल ही में सरायमीरा क्षेत्र में एक युवक की गर्दन में मांझा उलझ गया, जिससे वह सड़क पर गिर पड़ा। समय रहते लोगों ने उसे संभाल लिया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। केवल इंसान ही नहीं, बल्कि पक्षी भी इस मांझे का शिकार बन रहे हैं। शहर के कई इलाकों में घायल कबूतर और चील के पंखों में फंसे मांझे देखे गए हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि हर साल पतंगबाजी के मौसम में दर्जनों पक्षी घायल अवस्था में मिलते हैं। कई बार तो उनकी मौके पर ही मौत हो जाती है। इस तरह बनता है जानलेवा चाइनीज मांझा विशेषज्ञों के अनुसार चाइनीज मांझा नायलॉन से बनाया जाता है। इसमें कांच का बुरादा और धातु के बारीक कण मिलाए जाते हैं, जिससे इसमें बेहद तेज धार आ जाती है। यह मांझा खिंचने पर टूटने की बजाय और मजबूत हो जाता है। आम सूती मांझे के मुकाबले इसे काटना काफी मुश्किल होता है। यही वजह है कि यह पतंग काटने में कारगर होता है, लेकिन इंसानों और पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है। इनसेट: कन्नौज में चाइनीज मांझे से जुड़े हादसे 29 जनवरी 2022 को तालग्राम थाना क्षेत्र के मदारीपुर गांव निवासी हरि विलास बाइक से गुजर रहे थे तभी चाइनीज मांझे की चपेट में आकर उनकी गर्दन की नस कट गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। 08 फरवरी 2022 को लोहरिया पार्क के पास प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से दो मोरों की जान चली गई। 27 जनवरी 2023 को छिबरामऊ क्षेत्र के भैनपुरा गांव निवासी सुमित का चाइनीज मांझे से गला कट गया था। जिससे वह गंभीर रुप से घायल हो गया था। 10 फरवरी 2024 को ठठिया थाना क्षेत्र के खेरनगर गांव निवासी अनुज कुमार साइकिल से जाते समय चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गर्दन में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बोले अभिभावक… फोटो 21 आचार्य पवन शुक्ला हम बच्चों को बार-बार समझाते हैं कि देसी मांझा ही इस्तेमाल करें, डर लगता है कि कहीं बच्चे के साथ ही कोई बड़ा हादसा न हो जाए। बच्चों के साथ अभिभावकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।- पवन शुक्ला ,आचार्य फोटो 22 शिवांक बाजपेई अब बच्चों को बाहर खेलने भेजते समय डर लगता है। चीनी मांझा अगर पूरी तरह बंद नहीं हुआ तो हादसे रुकने वाले नहीं हैं। प्रशासन को सिर्फ कहने नहीं, जमीन पर सख्ती दिखानी होगी।- शिवांक बाजपेई इनसेट आंकड़ों पर एक नजर… 05 प्रमुख बाजारों में पतंग और मांझा की दुकानें 1.5 लाख रुपये से अधिक का सीजनल कारोबार 10 से ज्यादा मोहल्लों में होती है पतंगबाजी बोले चिकित्सक फोटो 23 शक्ति बसु सीएमएस जिला अस्पताल कन्नौज चाइनीज मांझे में कांच और धातु के कण होते हैं। इससे कट लगने पर नसें तक कट सकती हैं। अगर यह गर्दन, आंख या गले के पास लगे तो जान जाने का खतरा रहता है। ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। सबसे अच्छा उपाय है कि इस मांझे से पूरी तरह दूरी बनाई जाए।