
आतिशबाजी बाजार में मानकों की उड़ रही धज्जियां
Kannauj News - छिबरामऊ में दीपावली के दौरान आतिशबाजी बाजार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रशासन ने अचानक बाजार स्थान बदलकर कैरदा रोड पर शिफ्ट किया है, जहां दुकानों के बीच न्यूनतम दूरी का उल्लंघन हो रहा है।...
छिबरामऊ, संवाददाता। नगर में दीपावली की रौनक के बीच आतिशबाजी बाजार को लेकर प्रशासनिक हड़बड़ी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरू में अधिकारियों ने सौरिख रोड पर ककरारी तालाब के पास बाजार लगाने की संस्तुति की थी, लेकिन रातों रात यह फैसला पलट दिया गया। अब छिबरामऊ का प्रमुख आतिशबाजी बाजार कैरदा रोड पर तहसील जाने वाले रोड के सामने एक खेत में गुलजार हो चुका है। यहां लगभग पांच दर्जन से अधिक बड़ी-बड़ी दुकानें सजी हुई हैं, जो त्योहार के बाजार की चमक तो बिखेर रही हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से खतरे की घंटी बजा रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह स्थान शहर के व्यस्त इलाके से दूर होने के बावजूद, आसपास के खेतों और सड़क मार्गों से गुजरने वाले वाहनों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।

बाजार की शिफ्टिंग का यह अचानक निर्णय स्थानीय व्यापारियों को भी परेशान कर रहा है, क्योंकि कई ने पहले ही सौरिख रोड पर स्टॉल्स की तैयारी कर ली थी। दुकानों के बीच न्यूनतम दूरी का घोर उल्लंघन छिबरामऊ। सबसे चिंताजनक बात तो आतिशबाजी दुकानों के बीच न्यूनतम दूरी के उल्लंघन की है। आतिशबाजी बाजार के सख्त मानकों के मुताबिक, प्रत्येक दुकान के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी अनिवार्य है। ताकि किसी आगजनी की स्थिति में आग तेजी से न फैले, लेकिन छिबरामऊ के इस बाजार में सभी दुकानें एक-दूसरे से सटी हुई लगाई गई हैं। यह न केवल विस्फोटक अधिनियम 1984 और विस्फोटक विनियम 2008 के अध्याय सात का सीधा उल्लंघन है, बल्कि जानलेवा साबित हो सकता है। दुकानों को ढकने के लिए बजरी (रेत) की तीन परतों का उपयोग अनिवार्य है। पानी के ड्रम खाली, फायर ब्रिगेड की मौजूदगी मात्र औपचारिकता छिबरामऊ। सुरक्षा के नाम पर पानी के ड्रम तो रखे गए हैं, लेकिन उनमें फिलहाल एक बूंद भी पानी नहीं भरा हुआ है। प्रत्येक दुकान के पास पर्याप्त पानी की व्यवस्था और रेत के ड्रम अनिवार्य हैं, ताकि छोटी-मोटी चिंगारी को तुरंत बुझाया जा सके, लेकिन यहां यह सुविधा कागजों तक सीमित नजर आ रही है। सड़क के दूसरी तरफ फायर ब्रिगेड की गाड़ी खड़ी तो है, लेकिन उसकी मौजूदगी मात्र औपचारिकता लग रही है। बाजार में आने-जाने वाले ग्राहकों की भारी भीड़ के बीच कोई आपातकालीन निकासी योजना भी नजर नहीं आ रही। विशेषज्ञों के अनुसार, आतिशबाजी बाजारों में न्यूनतम 10 मीटर की दूरी पर फायर टेंडर तैनात होना चाहिए, लेकिन यहां की व्यवस्था अपर्याप्त है। इस संबंध में उप जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि कोतवाली पुलिस को मौके पर जाकर दुकानों पर लगे कपड़ों को हटाने के आदेश दिए जा रहे हैं। साथ ही, तीन मीटर के मानकों का किसी भी कीमत पर उल्लंघन नहीं किया जाएगा। एसडीएम ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सख्ती से ही बचेगी त्योहार की रौनक छिबरामऊ। नगर का यह आतिशबाजी बाजार सुरक्षा मानकों की अवहेलना का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। जहां दुकानों के बीच दूरी, रेत की परतें और फायर सेफ्टी प्लान अनिवार्य हैं। प्रशासन को न केवल कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए। वरना, दीपावली की खुशियां धमाकों की त्रासदी में बदल सकती हैं।

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