सत्संग भवन में फूलों से खेली गई होली, भाईचारे का दिया संदेश
Kannauj News - छिबरामऊ के संत निरंकारी सत्संग भवन में श्रद्धालुओं ने फूलों की होली खेली। महात्मा राजकुमार गुप्ताजी ने कहा कि त्योहारों का असली उद्देश्य प्रेम और सद्भाव को बढ़ाना है। कार्यक्रम में उपस्थित संत महापुरुषों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां साझा कीं। सभी ने प्रेम और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

छिबरामऊ, संवाददाता। नगर के पूर्वी बाईपास स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को श्रद्धालुओं और संत महात्माओं ने फूलों की होली खेलकर प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया। इस अवसर पर सत्संग का भी आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सत्संग के दौरान परम पूज्य महात्मा राजकुमार गुप्ताजी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ाना है। त्योहार पुराने गिले-शिकवे भुलाकर लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का माध्यम होते हैं। उन्होंने कहा कि होली नफरत की दीवारों को खत्म कर प्रेम और खुशियों का संदेश देती है।कार्यक्रम
में उपस्थित संत महापुरुषों और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर तथा फूलों की होली खेलकर पर्व की खुशियां साझा कीं और सभी को होली की शुभकामनाएं दीं। पूरे वातावरण में भक्ति, प्रेम और उल्लास का माहौल बना रहा।सत्संग में महात्मा जी ने भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए माता शबरी, भक्त प्रह्लाद, भक्त मीरा और भगवान राम के परम भक्त हनुमान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में डूबा हुआ भक्त अपने आराध्य के प्रेम में इतना लीन हो जाता है कि उसे संसार की कोई चिंता नहीं रहती। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने प्रेम, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
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