
भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
संक्षेप: Kannauj News - - महतेपुर्वा गांव में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा- आयोजकों ने आचार्य का फूल-मालाओं से किया जोरदार स्वागततिर्वा, संवाददाता।कोतवाली क्षेत्र के महतेपुर्वा गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य...
तिर्वा, संवाददाता। कोतवाली क्षेत्र के महतेपुर्वा गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य ने कृष्ण के जन्म का सजीव वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध दिया। कथा में कृष्ण जन्म, पूतना वध सहित तमाम राक्षसों के वध की कथा का वर्णन किया गया। कथा से पहले परीक्षित पूर्व प्रधानाचार्य हरिशचन्द्र द्विवेदी ने सरस कथा वाचक पं. कौशल किशोर को माला पहनाकर स्वागत किया। महतेपुर्वा गांव में दीनानाथ इण्टर काॅलेज के पूर्व प्रधानाचार्य हरिशचन्द्र द्विवेदी के आवास पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा में प्रसिद्ध आचार्य पंडित कौशल किशोर ने कथा के चैथे दिन श्री कृष्ण जन्म एवं पूतना वध सहित अनेक राक्षसों के वध का सजीव वर्णन कर जहां श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आचार्य ने कथा में बताया कि जब मथुरा के राजा कंस अपनी चचेरी बहन देवकी को छोडने उनके ससुराल जा रहे थे। तभी आकाशवाणी से ज्ञात हुआ कि जिस देवकी को तुम छोड़ने जा रहे हो, उसका आठवा पुत्र ही तेरा काल होगा। आकाशवाणी सुन राजा कंस ने देवकी एवं बासुदेव को मथुरा की कारागार में डाल दिया। बाहर सख्त पहेरा तैनात कर दिया। देवकी के सभी पुत्रों को उसने बारी-बारी से मारा डाला। भाद्रो की अष्टमी की रात में भगवान श्रीकृष्ण ने जेल में जन्म लिया। इसपर भगवान के कहने पर पिता बासुदेव उनको बाबा नन्द के घर छोड़ आए। बाबा नंद के यहां बालक के जन्म की सूचना पाते ही उत्सव जैसा माहौल शुरू हो गया। उधर राजा कंस ने भगवान श्री कृष्ण को मारने के लिए पूतना नाम की राक्षसी भेजी पूतना सहित बारी-बारी से अनेक राक्षसों का वध कर दिया। छोटी सी उम्र में कृष्ण के कारनामों को देख पूरा वृज उनकी पूजा करने लगा। आचार्य कौशल किशोर के मुखार बिंदु से कृष्ण जन्म की कहानी सुन श्रोता भाव-बिभोर हो गए। इससे पहले परीक्षित के रूप में पूर्व प्रधानाचार्य हरिशचन्द्र द्विवेदी ने आचार्य का माला पहनाकर एवं आरती उतारकर स्वागत किया।

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