
जीजा HIV+ था, साली को चढ़ गया उसी का दिया खून, पति ने लगाई इंसाफ की गुहार; मचा हड़कंप
अलीगढ़ में अपने मायके आई महिला को ऑपरेशन के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला का जीजा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से एक यूनिट खून लेने पहुंचा। डिमांड लेटर में बी पॉजिटिव ग्रुप का फ्रैश खून मांगा गया था। कर्मचारियों द्वारा ग्रुप मैच होने पर उसी का खून निकाल निजी अस्पताल को दे दिया गया।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में डींग (राजस्थान) के एक बंजारा परिवार की महिला को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने के चौंकाने वाले मामले की जांच फिर शुरू हो गई। निजी अस्पताल में हुए ऑपरेशन के दौरान महिला को उसी के जीजा द्वारा दिया गया खून चढ़ाया गया। बाद में जीजा के एचआईवी पॉजिटिव निकलने से परिवार में हड़कंप मच गया। महिला के पति ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज की, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। एडी हेल्थ ने कर्मचारियों और निजी अस्पताल से पूछताछ कर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर दी, जबकि सीएमओ ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है।
जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ में अपने मायके आई महिला को ऑपरेशन के लिए जेल रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 30 जून को एटा चुंगी निवासी महिला का जीजा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से एक यूनिट खून लेने पहुंचा। डिमांड लेटर में बी पॉजिटिव ग्रुप का फ्रैश खून मांगा गया था। कर्मचारियों द्वारा उसकी रैपिड जांच की गई, ग्रुप मैच होने पर उसी का खून निकालकर निजी अस्पताल को दे दिया गया। डोनर फार्म भी भरवाया गया। ऑपरेशन के दौरान यही खून महिला को चढ़ाया गया। करीब एक महीने बाद जब पेशे से ड्राइवर जीजा की जांच हुई तो वह एचआईवी पॉजिटिव पाया गया।
महिला के पति ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद एडी हेल्थ डॉ. मोहन झा ने पूरे मामले की जांच की। उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं, निजी अस्पताल में भी पूछताछ की गई है। विशेषज्ञों की राय में स्पष्ट हुआ कि ब्लड बैंक में जिस समय रैपिड जांच की गई थी, महिला का जीजा विंडो पीरियड में था, ऐसे में वायरस की मौजूदगी जांच में पकड़ में नहीं आती। इसी कारण संक्रमण तत्काल पता नहीं चल पाया। एडी हेल्थ ने जांच रिपोर्ट जमा कर दी है। वहीं, प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने भी एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है, जिसमें दीनदयाल अस्पताल और जेएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक भी शामिल किए गए हैं।





