जीवन की पाठशाला बने भूले-बिसरे खेल

Jan 12, 2026 10:40 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, झांसी
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Jhansi News - फोटो नं 18कैप्शन: आयोजन के दौरान उपस्थित संस्था पदाधिकारी और संस्था सदस्य झांसी संवाददाता। संस्था “प्रयास: सभी के लिए” के तत्वावधान में आयोजित पंचदिवस

जीवन की पाठशाला बने भूले-बिसरे खेल

संस्था “प्रयास: सभी के लिए” के तत्वावधान में आयोजित पंचदिवसीय युवा महोत्सव–2026 का तृतीय दिवस बौद्धिक ऊर्जा, वैचारिक गंभीरता और सामाजिक चेतना से परिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर आयोजित इस दिवस ने यह स्पष्ट कर दिया कि भूले-बिसरे खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों की सजीव पाठशाला हैं, जो व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम बिपिन बिहारी महाविद्यालय परिसर में सम्पन्न हुआ। “भूले-बिसरे खेल और समाज व राष्ट्र में उनकी भूमिका” विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता का शुभारम्भ मुख्य अतिथि मनोज जी (विभाग प्रचारक) राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं विशिष्ट अतिथि सुधीर सिंह (जिलाध्यक्ष भाजपा, महानगर झांसी), तीर्थ कुमार शर्मा (प्रधानाचार्य, बी.बी.सी.) के कर-कमलों से स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

इस अवसर पर अभिषेक सेन, दीपांशु डे एवं राजू देवलिया अतिथि रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि मनोज जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी स्वस्थ, अनुशासित और चरित्रवान युवा पीढ़ी होती है। भूले-बिसरे खेल युवाओं को न केवल शारीरिक रूप से सक्षम बनाते हैं, बल्कि उनमें सहयोग, संयम, धैर्य और नेतृत्व जैसे गुणों का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा मैदान में खेलना सीखता है, तभी वह जीवन के मैदान में संघर्ष और विजय दोनों को संतुलन के साथ स्वीकार करना सीखता है—और यही संतुलन एक सशक्त राष्ट्र की आधारशिला बनता है। महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज का डिजिटल युग युवाओं को स्क्रीन तक सीमित कर रहा है, जिससे सामाजिक दूरी, मानसिक तनाव और असंतुलन बढ़ रहा है। ऐसे समय में पारंपरिक खेल युवाओं को मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और सामूहिक चेतना से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है और स्वस्थ मस्तिष्क ही विचारशील नागरिक गढ़ता है—जो आगे चलकर एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करता है। यही प्रयास संस्था का मूल उद्देश्य है। निर्णायक मंडल में डॉ. वेद प्रकाश शुक्ला (सहायक आचार्य, रसायन विभाग), डॉ. दिलीप कुमार सिंघल (असिस्टेंट प्रोफेसर) एवं डॉ. विनोद चन्द्र द्विवेदी (सहायक आचार्य, भौतिकी) उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा 14 जनवरी को आयोजित सांस्कृतिक समापन संध्या में की जाएगी, जहाँ उन्हें सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा। कार्यक्रम का संयोजन नवीन श्रीवास्तव एवं राकेश मेहरोत्रा द्वारा किया गया। संचालन रामकुमार लोहिया और डॉ सिप्पी दासानी ने प्रभावशाली रूप से सम्पन्न कराया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सुनील खरे, अशोक अग्रवाल (पीएनबी), बी.पी. नायक, महेश चन्द्र मिश्रा, एडवोकेट बिजय खरे, एच.एन. शर्मा, सतीश साहनी, अरुण खरे, अविनाश दीक्षित, विनय व्यास आदि उपस्थित रहे।

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