महिला किसान ने फांसी ने लगा दी जान

महिला किसान ने फांसी ने लगा दी जान

संक्षेप:

Jhansi News - चिरगांव थाना क्षेत्र के गांव छिरौना में 45 वर्षीय महिला किसान बबीता राजपूत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सोमवार रात परिवार के साथ खाना खाने के बाद वह सोने गईं। मंगलवार सुबह परिवार ने उन्हें फंदे पर लटका पाया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

Nov 04, 2025 10:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, झांसी
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चिरगांव थाना क्षेत्र में सनसनीखेज मामला सामने आया है। गांव छिरौना मे 45 वर्षीय महिला किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। मंगलवार सुबह वह बंद कमरे में साड़ी से फंदे पर झूलती मिलने से परिवार में कोहराम मच गया। वहीं पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। खुदकुशी का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। गांव छिरौना की रहने वाली बबीता राजपूत (45) पत्नी स्व. उमेश राजपूत किसान थी। वह अपने 18 वर्षीय बेटे ऋषि के साथ रहती थी। सोमवार की रात खेत से घर आई और परिजनों के साथ खाना खाया। इसके बाद सभी सोने चले गए। तभी बबीता अंदर के कमरे में गई।

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वहां उसने साड़ी से फांसी का फंदा बनाया और झूल गई। मंगलवार को सुबह जब परिजन नींद से जागे तो बबीता की कोई आहट नहीं हुई। उन्होंने अंदर के कमरे में देखा तो दंग रह गई। वह फांसी के फंदे पर झूल रही थी। जिससे वह चीख पड़े। शोर सुनकर आसपास हड़कंप मच गया। बबीता के देवर चंद्रशेखर राजपूत ने बताया कि आनन फानन में परिवार के लोगों ने भाभी को फंदे से उतारा। तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिससे परिजन फूट-फूटकर कर रो पड़े। उन्होंने बताया, ऐसे भाभी ने क्यों किया? कुछ पता नहीं? घर पर भी कोई बात नहीं हुई थी। सूचना पर चिरगांव थाने में उपनिरीक्षक अजमेर सिंह, अशोक कुमार सिंह, सविता ने पुलिस बल के साथ मौका-मुआयना किया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस की मानें तो प्रथम दृष्टया मामला खुदकुशी का है। जांच की जा रही है। अगर कोई शिकायत आती है तो अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। चीखने की आवाजें सुन गांव में पसरा मातम गांव छिरौना में महिला द्वारा फांसी लगाकर दी गई जान के बाद परिजन फूट-फूटकर रो पड़े। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि जब रोने-चीखने की आवाजें आई तब घटना की जानकारी हो सकी। मृतका के देवर चंद्रशेखर राजपूत ने बताया कि भाभी खेती-बाड़ी करती थी। कल खेत गई थी। काम किया। देर रात आई। पर, पता नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठाएंगी। बताया, भाई उमेश राजपूत का निधन करीब 14 साल पहले हो चुका था। उनकी मौत के बाद भाभी बबीता खेती-बाड़ी करके अपना और अपने बेटे का पालन-पोषण कर रही थीं। उनकी मौत के बाद बेटे ऋषि का रो-रोकर बुरा हाल है। वह पढ़ाई करता है।