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1 दिसंबर, 2020|2:12|IST

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दिवाली के लिए गौवंश के गोबर से बन रहे दिए और मूर्ति

दिवाली के लिए गौवंश के गोबर से बन रहे दिए और मूर्ति

1 / 2प्रदेश सरकार गौवंश की देखरेख के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है और अब गौशाला अपनी कमाई गोबर के जरिए ही करेगी। जनपद की गौशाला में गोबर को मिट्टी के साथ मिलाया जा रहा है। हजारों की तादात में दिए तैयार...

दिवाली के लिए गौवंश के गोबर से बन रहे दिए और मूर्ति

2 / 2प्रदेश सरकार गौवंश की देखरेख के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है और अब गौशाला अपनी कमाई गोबर के जरिए ही करेगी। जनपद की गौशाला में गोबर को मिट्टी के साथ मिलाया जा रहा है। हजारों की तादात में दिए तैयार...

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प्रदेश सरकार गौवंश की देखरेख के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है और अब गौशाला अपनी कमाई गोबर के जरिए ही करेगी। जनपद की गौशाला में गोबर को मिट्टी के साथ मिलाया जा रहा है। हजारों की तादात में दिए तैयार कर लिए गए। जिनकी बिक्री दिवाली के सात दिन पहले होगी और इनसे होने वाली आय को गौवंश की देखरेख में ही दिया जाएगा।

दीपावली के त्योहार पर बड़ी संख्या में दिया की खरीद होती है और साथ ही शुभलाभ व मूर्तियां ली जाती है। इसमें धार्मिक दृष्टि से गाय का गोबर अधिकांश प्रयोग होता है। इसी को देखते हुए पशुपालन एक नई शुरूआत कर रहा है। गौवंश के गोबर को मिट्टी में मिलाकर दिया व मूर्ति बनवा रहा। पशुपालन विभाग ने बताया कि अब तक 50 हजार दियों का निर्माण कर लिया गया है।

दिया के अलावा शुभलाभ और मूर्ति लक्ष्मी गणेश की भी है। इनकी बिक्री दिवाली के सात दिन पहले ही शुरू करा दी जाएगी। इनका तेजी से निर्माण कार्य गौवंश वन्य विहार सुकुंवा बबीना और गौवंश वन्य विहार लुहरगांव घाट चिरगांव के द्वारा हो रहा है। यहां पर बड़ी संख्या में गौवंश का पालन पोषण भी हो रहा। बताया, सुकुवां में 625 और लुहरगांव में 546 गौवंश है।

मिट्टी और गोबर से बने सभी उत्पादों को आगामी दिवाली के सात दिन पहले सदर बाजार, बीकेडी चौराहा, सीपरी बाजार और शहर में उचित दरों पर बिक्री की जाएगी। कुल आय को सीधे गौवंश के लिए दे दिया जाएगा।

बोले सीवीओ

मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा वाई एस तोमर ने कहा कि उ.प्र. गौसेवा आयोग के विशेष अभियान के तहत यह कार्य शुरू किया गया है। अब तक 50 हजार दिए बन चुके। कई मूर्ति व शुभ लाभ बन रहे है। इसमें काली मिट्टी के साथ शुभ प्रतीक गाय का गोबर मिलाया गया है। जिसकी कुल आय को गौवंश वन्य विहार के लिए ही खर्च कर दिया जाएगा।

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  • Web Title:Sculptures made from cow dung cow dung for Diwali