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23 जनवरी, 2021|12:58|IST

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मां के आंगन में उतरी रानी की नगरी, पूजी गईं महागौरी

मां के आंगन में उतरी रानी की नगरी, पूजी गईं महागौरी

...बजते शंख-ढोल-ताशे, ..तालियों की गड़गड़ाहट, जुबां पर ....काली..काली, ..जय मां काली .., जय काली कल्याण करो मां और मौका मां कालरात्रि की मंगला आरती का। शुक्रवार-शनिवार की रात यही माहौल रहा। वहीं, शनिवार भोर से मां के आंगन में रानी की नगरी उतरी आई। मां महागौरी घर-घर पूजी गईं। कहीं-कहीं महानवमी भी मनाई गई। पीठों-मंदिरों में आस्था का मेला सा लगा रहा। आधी रात को अष्टमी की महाआरती हुई।

शनिवार भोर से घर-घर उत्सवी माहौल रहा। देवी स्वरूप कुंवारी कन्याओं का पूजन कर, कहीं पांच, सात, नौ, ग्यारह तो कहीं इससे भी अधिक उन्हें जिमाया गया। ईसाईटोला स्थित नीम वाली माता मंदिर पर शनिवार बड़ी संख्या में भक्त उमड़े। सिद्धेश्वर सिद्धपीठ मंदिर में मां पीताम्बरा, लहर सिद्धपीठ, काली सिद्ध पीठ, करौंदी वाली माता, अन्नपूर्णा सिद्धपीठ, पंचकुइयां वाली माता, कैमासन, मैमासन देवी, अंजनी माता मंदिर, बरुआसागर स्थित मंसिल माता मंदिरों में मां का विशेष श्रृंगार हुआ। आरती हुई। सोशल डिस्टेंसिंग में किसी ने प्रसाद तो किसी ने चुनरी चढ़ाई। वहीं, झोली फैलाकर सुख-समृद्धि की कामना की।

सोमवार को निकलेगी मां काली जी की सवारी

जिला धर्माचार्य महंत विष्णुदत्त स्वामी के अनुसार शनिवार को महाष्टमी और महानवमी मनाई गई। परंपरानुसार बंगाल में शोभायात्रा निकाली जाती है। उसी दिन काली जी की प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। लिहाजा, सोमवार को काली जी की सवारी निकाली जाएगी। रविवार को दशहरा मनाया जाएगा। मां दुर्गा जी की प्रतिमाएं भी विसर्जित होंगी। सदर बाजार काली माता समिति के सदस्य दीपक मौर्य ने बताया कि सोमवार सुबह 10:30 बजे काली जी की विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी।

आज मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना

मां दुर्गा जी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। रविवार को सभी प्रकार की सिद्धियां देने वाली, चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री का पूजन होगा।पूजारियों के अनुसार नवरात्र की नौ देवियों में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। ये चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। मां सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर आसीन होती हैं। मां सिद्धिदात्री के स्मरण मात्र से सुख-समृद्धि मिलती है। इनकी आराधना से अन्य सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इनकी उपासना पूरी कर लेने के बाद भक्तों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

आधी रात को महाष्टमी की आरती

शनिवार को घर, मंदिर, दुर्गा पंडालों में सोशल डिस्टेंसिंग में पूजा-अर्चना की गई। रात गहरी होते ही शहर के अधिकांश रास्ते सिद्धपीठों-प्राचीन मंदिरों की तरफ मुड़ गए। पंडालों में मंत्रोच्चारण, शंख ध्वनि, ढोल-ताशे बजने लगे। रात 12 बजते ही देवी मंदिरों में महाष्टमी की महाआरती हुई। कई स्थानों पर हलवा-पूरी, हलवा-चना, खिचड़ी सहित अन्य का प्रसाद वितरण किया गया। वहीं, भोर से होम-हवन, भंडारे हुए।

दशहरा आज, कल होगा रावण वध

रविवार को दशहरा मनाया जाएगा। महामारी के चलते इस बार सदर, क्रॉफ्ट मेला ग्राउंड पर रावण दहन नहीं हो रहा है। सदर बाजार रामलीला कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष विकास खत्री ने बताया कि सोमवार को मंच पर चल रही रामलीला में रावण वध का मंचन किया जाएगा। आर्मी क्षेत्र स्थित ग्राउंड पर रावण, कुंभकरण, मेघनाथ के पुतले दहन नहीं होंगे। बुन्देलखण्ड दशहरा कमेटी के आयोजक-अध्यक्ष अशोक जैन ने बताया कि शर्तों की वजह से कोई आयोजन नहीं किया जा रहा है। वहीं, दशहरा को लेकर शहर के बाजार सज गए हैं। गिफ्ट पैक, मिठाई, फल-फूल की दुकानें संवर उठीं हैं। खास तौर से पान की ज्यादा डिमांड रहती है। लिहाजा, व्यापारी भी तैयारी में जुट गए हैं।

ग्रामीण अंचलों में मनीं महाष्टमी

नवरात्र के आठवें दिन, तहसील, ब्लॉक, ग्राम पंचायत, गांव-देहात में दिनभर ‘शक्ति की भक्ति हुई। श्रद्धाभाव से महाष्टमी पर्व मनाया गया। बरुआसागर, समथर, बड़ागांव, पारीछा, मऊरानीपुर, रानीपुर, बंगरा, मोंठ, चिरगांव, सकरार सहित अन्य इलाकों में भोर से ही माई द्वारे श्रद्धालुओं का मेला सा लगा रहा।

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  • Web Title:Queen 39 s city descended in mother 39 s courtyard Mahagauri visited