बदहाली पर आंसू बहा रही बबीना की जीवनरेखा
झांसी का मोती तालाब, जिसे कभी बबीना की जीवनरेखा माना जाता था, अब बदहाली का सामना कर रहा है। गंदगी और जलकुंभी ने इसकी सुंदरता को मिटा दिया है। स्थानीय लोग तालाब की सफाई और संरक्षण की मांग कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी बेफिक्र हैं। यह तालाब धार्मिक और सामाजिक महत्व रखता है।
झांसी। कभी बबीना की जीवनरेखा कहे जाने वाला मोती तालाब बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कई गंदे नालों का मुंह तालाब में खुला है। जिससे पानी काला मटमैला हो गया। दुर्गध-गंदगी दूर जाने को कहती है। हालात यह है कि जलकुंभी ने खूबसूरती मिटा दी है। फिर भी जिम्मेदार बेफिक्र हैं। बबीनावालों ने इसकी सफाई और संरक्षण की फिर आवाज उठाई है। क्षेत्रवासियों के अनुसार बरसों पहले रायकवार समाज के लोग इस तालाब में सिंघाड़ा, मुरार और कमलगट्टे की खेती के साथ मछली पालन करते थे। जिससे उनकी आजीविका चलती थी। घूमने के लिए यह स्थान किसी पिकनिक स्पॉट से कम न था।
मोती तालाब का धार्मिक और सामाजिक महत्व रखता है। यहां प्रतिमा, मोर विसर्जित होते हैं तो मुहर्रम के दौरान ताजियों भी ठंडे कराए जाते हैं। वर्तमान में शाम गहरी होते अराजक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। इसके करीब प्लास्टिक के गिला, शराब की खाली बोतलें सहित अन्य सबकुछ बयां करतेहैं। दीपक सिंह ने छावनी परिषद से प्राचीन धरोहर का संरक्षण और विकास की मांग की है। सादिक मंसूरी ने मोती तालाब की नियमित साफ-सफाई, संरक्षण और उचित रखरखाव सुनिश्चित किए जाने की बात कही है। दीपक रावत ने कहा कि जब तक मोती तालाब की साफ-सफाई, जीर्णोद्धार और संरक्षण नहीं होगा। तब तक इसकी पुरानी पहचान वापस नहीं लौट सकती। उन्होंने जल संरक्षण, अमृत सरोवर योजना से तालाब के पुनरोद्धार की वकालत की है। ताकि प्राचीन धरोहर को संजो कर रखा जा सके। मनोनीत पार्षद पलविंदर सिंह नंदा ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर छावनी परिषद के अधिशाषी अधिकारी से वार्ता की है। इस पर उन्हें आश्वासन दिया गया है।
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