
बिजौली की खंती बनी भूमि, जल और वायु के लिए खतरा
Jhansi News - झांसी संवाददाता। झांसी। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने प्रमुख सचिव नगर विकास, केंद्रीय पॉल्युशन बोर्ड व स्टेट पॉल्युशन बोर्ड को बीते दिनों
झांसी। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने प्रमुख सचिव नगर विकास, केंद्रीय पॉल्युशन बोर्ड व स्टेट पॉल्युशन बोर्ड को बीते दिनों पत्र भेजकर नगर निगम की बिजौली खंती (डंपिंग साइट) को समीपवर्ती क्षेत्रों के लिए खतरा बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की बात कही। उन्होंने बताया कि खंती में प्लास्टिक व रासायनिक कचरे से जलवायु के साथभूमिगत जलस्तर के लिए खतरा पैदा हो गया है। समीपवर्ती बस्ती में लगे हैंडपंपों का पानी प्रदूषित होने लगा है। वहीं खंती के कचरे को जलाए जाने से भीषण वायु प्रदूषण भी हो रहा है। जहरीले धुंए से खंती के समीप रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
शिकायती पत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अवगत कराया था कि बिजौली की खंती में महानगर से निकलने वाले कचरे को पृथक किए बिना भर दिया गया है। यहां आबादी भी है, नल की व्यवस्था न होने की वजह से घरों में हडपंप लगे हैं। वहीं खंती में भरे कचरे का जहरीला रसायन जमीन में भर रहा है जिससे भूमिगत जल प्रदूषित हो गया है, यही हैंडपंप से प्रदूषित पानी निकलता है। वहीं कचरे के ढेरों का नगर निगम के कर्मचारी पृथक करके निस्तारण करने की बजाए उसमें आग लगा देते हैं, जिसकी वजह से वायु प्रदूषण होता है। जब वहाँ के निवासियों द्वारा इसका विरोध किया जाता है तो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करा दिए जाते हैं। जो कचरा बिजौली की खंतियों में भरा हुआ है उसे तत्काल निकालने तथा सुरक्षित तरीके से निस्तारण करने की आवश्यकता है अन्यथा यह कचरा भूमिगत जल के लिए सदा खतरा बना रहेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से बात की और बिजौली में खंती को बंद कराए जाने की मांग की। उनका कहना है कि नियमानुसार कचरा निस्तारण का कार्य शहर या बस्ती से दूर किया जाना चाहिए। कचरे को विधिवत विस्तारित किया जाना चाहिए पर नहीं किया जा रहा है। उक्त कार्य देख रही कंपनी के खिलाफ कई बार शिकायत की गई की पर नगर निगम प्रशासन द्वारा कोई कि कार्रवाई नहीं की गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि की महानगर में कचरा निस्तारण के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रह करने की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसमें भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जैविक और सूखे कचरे को पृथक नहीं किया जा रहा है। नगर में जगह-जगह प्रतिबंधित पालीथिन के साथ प्लास्टिक कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं। इस कचरे को सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु खाते हैं, जिसकी वजह से उनकी मौत हो सकती है। इस का नगर में वासियों द्वारा विरोध करने पर उनके क खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए गए जोकि सरासर गलत है। यदि स्थानीय निवासी भूमि, जल तथा नव वायु के लिए खतरा बन चुकी खंती और कचरे का विरोध कर रहे हैं और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर आवाज उठा रहे हैं तो उनकी आवाज को नहीं दबाया जाना चाहिए।

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