व्यवसायिक खेती के लिए जून माह में करें किसान बुआई
Jhansi News - झांसी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष सिंह ने किसानों को पड़ोरा (ककोड़ा) की व्यावसायिक खेती अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि सही नर-मादा पौधों का अनुपात बनाए रखकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसकी बुवाई जून से जुलाई के बीच की जा सकती है।

झांसी। अब गुजरे जमाने की बातें है कि पड़ोरा अपने आप ही उग आते है और बारिश में इनकी बेल जगह जगह दिख जाती थी। बेहद स्वादिष्ट पड़ोरा के भाव भी बाजार में शुरूआत में सौ से डेड़ सौ रुपए प्रति किग्रा तक रहते है। पर, अच्छी बात यह है कि अब कृषि विज्ञानियों ने इसे खेती के रूप में पैदा करने के तरीके किसानों के लिए जारी किए। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष सिंह ने किसानों को पड़ोरा (ककोड़ा) की व्यावसायिक खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा है कि यदि किसान नर एवं मादा पौधों का सही अनुपात बनाए रखें।
कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोरा या ककोड़ा की खेती विशेष रूप से गर्मी के मौसम में अधिक लाभकारी सिद्ध होती है।इसकी बुवाई जून माह के दूसरे सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक उपयुक्त रहती है। वर्षा ऋतु में जुलाई के अंत तक भी इसकी बुवाई की जा सकती है। डॉ सिंह के अनुसार ककोड़ा का प्रवर्धन बीज, तना एवं कंद तीनों विधियों से किया जाता है, लेकिन अधिक उत्पादन के लिए नर-मादा पौधों का संतुलन अत्यंत आवश्यक है। डॉ. सिंह ने बताया कि बीज द्वारा बुवाई जून-जुलाई में की जाती है। एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 8 से 10 किलो बीज पर्याप्त होता। खेत में 8 मादा पौधों पर 1 नर पौधा रखना अधिक लाभकारी माना गया है।
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