Jhansi News: रोनिजा बनेगा कृषि वानिकी का मॉडल ग्राम
Jhansi News: झांसी के ग्राम रोनिजा में कृषि वानिकी की उन्नत तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें किसानों को 135 दिन की अरहर के बीज बोने और उन्नत उपकरणों के बारे में जानकारी दी जा रही है। कृषि वानिकी मॉडल विकसित करने के लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है।

Jhansi News: झांसी। जनपद के बड़ागांव विकासखंड के ग्राम रोनिजा में "कृषि वानिकी की उन्नत तकनीक" विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। जिसमें किसानों को उन्नत तकनीक के बारे में बताया जाएगा। किसानों को 135 दिन की अरहर का बीज बताया कि इसे बोएं और किसान अधिक दाम कमाएं। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह, उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष श्रीवास्तव, वानिकी विभागाध्यक्ष एवं सह-अधिष्ठाता डॉ. एमजे डोबरियाल तथा संयोजक डॉ. प्रभात तिवारी ने चयनित किसानों को उन्नत कृषि वानिकी उपकरण एवं शेडनेट मुहैया कराये। वैज्ञानिकों ने ग्राम में स्थापित मीलिया एवं कदम्ब आधारित कृषि वानिकी मॉडलों का भी अवलोकन किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य
केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने तकनीकों के जरिए रोनिजा को एक आदर्श "कृषि वानिकी मॉडल ग्राम" के रूप में विकसित करना है। पिछले तीन वर्षों से इस गांव में किसानों को नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा आवश्यक कृषि सामग्री मुहैया करा रहा। इस मॉडल को अन्य विकासखंडों के नए गांवों तक भी पहुंचाना है।
किसानों की अनुभवी बातें
किसानों ने बताया कि लगभग 20 वर्ष पूर्व गांव में अरहर की खेती बहुत होती थी पर अन्ना पशुओं, पानी की कमी ने उत्पादन में कमी की। डॉ. सिंह ने किसानों को सलाह दी कि वर्तमान में उपलब्ध लगभग 135 दिन में तैयार होने वाली उन्नत अरहर किस्मों को बोएं। वर्षा ऋतु में बुवाई करें। उसी खेत में गेहूं की खेती भी की जा सकती।
भूमि की उपयुक्तता
उन्होंने यह भी बताया कि रोनिजा की पथरीली, ढालदार एवं कम उपजाऊ भूमि कृषि वानिकी के लिए अत्यंत उपयुक्त है। ऐसी भूमि पर वानिकी, फलदार वृक्ष तथा अन्य फसलों के समन्वित मॉडल अपनाकर किसान अधिक लाभ अर्जित कर सकते।
इंसेट
भविष्य की संभावनाएँ
बुन्देलखंड किसानों के लिए प्रेरणा बनेगा
वानिकी विभागाध्यक्ष एवं सह-अधिष्ठाता डॉ. एमजे डोबरियाल ने कहा, "रोनिजा में विकसित कृषि वानिकी मॉडल आने वाले समय में पूरे बुंदेलखंड के किसानों के लिए प्रेरणा बनेगा। मीलिया, कदम्ब एवं अन्य बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों के साथ कृषि फसलों का समन्वय किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।


