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चिकित्सक शिक्षकों की कमी पूरी करने में जुटा कॉलेज प्रशासन

चिकित्सक शिक्षकों की कमी से जूझ रहा मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन दिनों कमी को पूरा करने का प्रयास कर रहा है। जिसके चलते जहां उसे शासन से रिस्पांस मिल रहा है। वहीं खाली पदों को भरने के लिये साक्षात्कार चल रहे है। जिनके बाद रिक्त पडे़ पदों पर जल्द ही नियुक्ति होने की संभावना है। गौरतलब है कि एम सी आई के मानकों के अनुसार 34 प्रतिशत शिक्षकों की कमी है। जिसके चलते कॉलेज की सीटों पर हमेशा मान्यता को लेकर संकट मंडराता रहता है।

संविदा सहित रिटायर्ड प्रोफेसरों के सहारे चल रही बुन्देलखण्ड की चिकित्सा शिक्षा के हालात अब भी कुछ खास नहीं बदले है। एम सी आई के मानकों के अनुसार अब भी मेडिकल कॉलेज में 34 फीसदी चिकित्सा शिक्षकों की कमीं है। जिसके चलते सीटों पर खतरा मंडराता रहता है। कॉलेज प्रशासन की मानें तो एमसीआई 10 फीसदी चिकित्सक शिक्षकों पर मान्यता देने में रियायत दे देती है। कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों की मानें तो वह चिकित्सक शिक्षकों की कमीं को पूरा करने के लिए कई बार पत्राचार कर चुके है। लेकिन अब तक यह कमी पूरी नहीं हो सकी। कॉलेज की प्राचार्य डा साधना कौशिक ने बताया कि इस बार शासन से रिस्पांस मिल रहा है। जिसके बाद शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिये शासन स्तर पर चिकित्सकों के साक्षात्कार चल रहे है। उन्होंने जल्द ही खाली पदों पर नियुक्त होने की संभावना जताई है।

ये है वर्तमान स्थिति

कॉलेज प्रशासन के अनुसार एमसीआई के मानकों के तहत प्रोफेसर्स, ऐसोसिएट प्रोफेसर्स व असिस्टेंट प्रोफेसर्स के कुल 140 पद स्वीकृत है। जिनमें 26 पद प्रोफेसर के है। जिनमें से 7 पदो पर नियमित प्रोफेसर तैनात है जबकि 8 प्रोफेसर संविदा पर है। इसके अलावा 11 पद खाली पडे़ है। एसोसिएट के 42 के पद है। जिनमें से 21 पदो पर नियमित नियुक्त है। 13 संविदा पर भरे है। जबकि 8 पद खाली है। एसिसटेंट प्रोफेसर्स के मामले में 72 पद है। जिनमें 40 पर नियमित शिक्षक है। जबकि 17 संविदा पर है। इसके अलावा 15 पद खाली पडे़ है।

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  • Web Title:College administration to meet the shortage of doctor teachers