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बुन्देलखण्ड में बनाएंगे जैविक खेती उत्पादों का बाजार

बुन्देलखण्ड में बनाएंगे जैविक खेती उत्पादों का बाजार

बुन्देलखण्ड में जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए अलग से बाजार उपलब्ध कराए जाने का तोहफा प्रमुख सचिव कृषि ने खरीफ गोष्ठी के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि देहरादून की तर्ज पर यहां भी हम बाजार बना सकते है। जो जिला सबसे पहले इसके लिए हमें नगर निगम या नगर पालिका की भूमि उपलब्ध कराएगा, वहां पर हम बाजार का निर्माण करेंगे। जिससे किसानों को उपज का मूल्य बेहतर प्राप्त हो सकेगा।

प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद ने खरीफ गोष्ठी के दौरान कहा कि बुन्देलखण्ड में कई किसान जैविक खेती की ओर बढ़ रहे है। वहीं आम लोग भी रासायनिक खेती के उत्पादों की जगह जैविक खेती के उत्पादों को खरीदना चाहते है, लेकिन अलग से न तो किसानों के लिए कोई स्थल है और न ही आम लोगों के लिए। जिसकी शुरूआत बुन्देलखण्ड में करना चाहते है। जिसके लिए नगर विकास प्रमुख सचिव को पत्र लिखा गया है और भूमि मांगी है।

उन्होंने कहा कि 500 से 1 हजार वर्गमीटर की भूमि मिलने पर वहां पर अलग से जैविक खेती द्वारा पैदा किए जा रहे फसलों के उत्पादों को बेचा जा सकेगा। जिसमें किसानों को किसी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि हम फंड की व्यवस्था कर लेंगे। जिससे आगे्रनिक ग्रुप और पेस्टीसाइट में खेती करने वाले किसान सामान की बिक्री करेंगे। बताय देहरादून में इसी तरह का अलग से बाजार लगता है। बुन्देलखण्ड से जो भी जिला पहले आवेदन भेजेगा वहां कार्य शुरू करा देंगे।

उन्होंने कहा कि किसानों को बिक्री के लिए मंडी अधिनियम में बदलाव किया। जिससे किसान कहीं भी अपने उत्पाद बेचने स्वतंत्र है। खेत से भी उत्पाद सीधे बेचने के लिए कानूनी रूप दे दिया। जिससे बाजार आपके घर आ सके।

फसलों की पैदावार एक तरह की नहीं अलग अलग तरह करने की सलाह दी। ताकि रेट एकदम धड़ाम न हो। उन्होंने फल फूल और मसालों की खेती की सलाह दी।

बताया, सभी डीएम को पत्र भेज चुके है। सीएम के निर्देश पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड देनेे के लिए हर ब्लाक में 5 कैम्प लगाए जाने है। आगामी 21 जून तक किसानों की पाठशाला भी होगी। जिसमें किसानों को खाद की जांच, बीज शोधन घर में ही करने की जानकारी दी जाएगी। उर्द का पैसा न मिलने पर कहा कि वे सहकारिता विभाग से बात कर जल्द समस्या हल करा देंगे।

बुन्देलखण्ड के सभी लघु सीमांत किसानों के बनेंगे केसीसी

झांसी चित्रकूट मंडल में अब भी करीब 9 लाख किसान ऐसे है जिनके केसीसी कार्ड नहीं बने है। इस वजह से इन्हें फसली ऋण की सुविधा नहीं मिल पाती है। जिसके लिए नाबार्ड के सहयोग से विशेष अभियान चलेगा। जिन किसानों के पास केसीसी नहीं है, उन्हें जुलाई माह तक केसीसी कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे। यह बात कृषि उत्पादन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने कही।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि इसके लिए रणनीति बना ली गई है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक होगी। हर गांव में एक बैंक की ब्रांच का रोस्टर होगा। जिसमें सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे। आगामी 18-20 जून के बीच कैम्प लगाए जाएंगे और जिनके भी केसीसी नहीं बने है उनके केसीसी का वितरण 1 जुलाई से 7 जुलाई के बीच कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद केन्द्रों पर समय से भुगतान के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। कहा, पैदावार बढ़ने से उपज का सार्थक मूल्य नहीं मिलता है। जिसके लिए विकल्प हमने मंडी के अधिनियम में संशोधन करके किसान को बिक्री के लिए स्वतंत्र कर दिया। जहां अधिक दाम मिले किसान वहां बेचे। छुट्टा पशुओं पर भी प्रभावी योजना बन चुकी है। जिसे जल्द लागू किया जाएगा। फिर जो पशु अगले साल सामने होंगे उन्हें किसान खूंटी से बांधेगा। सिंचाई और पेयजल पर खेत तालाब योजना से 10 हजार बन चुके। इस बार मानसून फारकास्ट अच्छा है। उन्होंने किसानों को पूर्व के सालों की तरह खेती के साथ गाय भेंस, मुर्गी पालन इंटीग्रेटेड फार्मिग पर जोर देने के लिए कहा, ताकि सूखा पड़े तो किसान के आय के जरिए अन्य भी हो।

ये बोले अधिकारी

सभी जिलों में बीज, खाद कीटनाशक पर्याप्त है। खरीफ की प्लानिंग भी हो चुकी है। जिसके बारे में सभी डीएम ने बातें रखीं।

झांसी जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने सूखा ग्रस्त घोषित तहसील व गांव बताए। फिर कहा कि बरुआसागर में फूड प्रोसेसिग की प्लानिंग है। मटर की फूड प्रोसेसिंग हो सकती। जमीन भी है कच्चा माल और इन्वेस्टर भी है।

जालौन डीएम डा मन्नान ने कहा खरीफ में 40 फीसदी वृद्धि प्लानिंग है। 68 हजार है की जगह 86 हजार है में खरीफ की प्लानिंग है। बोले, दलहन की तैयारी पहले हो तो अच्छा रिजल्ट मिलेगा।

ललितपुर डीएम मानवेन्द्र ने कहा नदी किनारे पौधे लगाने के फायदे मिलेगे। ्प्रिरंकलर सेट का सही उपयोग होना चाहिए। कई लोग पाइप का ही इस्तेमाल करते है। जबकि ्प्रिरंकलर से कम पानी खर्च होता।

हमीरपुर डीएम राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि पांच बांध है जिनके पानी का प्रयोग करते। मौदहा में पानी रोका, जून में दोबारा तालाब भरेंगे। उन्होंने 5 हार्स पावर कनेक्शन में सब्सिडी 40 फीसदी से बढ़ाने की बात रखी।

महोबा डीएम ने कहा कि जिला दैवीय आपदा से पीड़ित है। सिंचाई के लिए अर्जुन सहायक पर निर्भर है। पान की खेती अधिक होती जो फसलों में अधिसूचित भी नहीं। अधिसूचित होती तो किसानों को लाभ मिलता।

बांदा डीएम ने कहा कि गेहूं का रिकार्ड उत्पादन हुआ। खरीफ में 45 फीसदी वृद्धि करेंगे। तालाबों में पानी ज्यादा नहीं इसे भरवाएंगे। सिंचाई के लिए रोस्टर 5 जुलाई से जारी कर देंगे।

चित्रकूट सीडीओ ने कहा, खेतों में बारिश के पानी का संचित किया जाए और कुओं में डाला जाए तो इससे पानी का वाष्पीकरण नहीं हो सकेगा। भूगर्भ का जल स्तर अच्छा होगा।

गोष्ठी चलती रही ये सोते रहे

हमीरपुर से आए सीवीओ और बगल में बैठे एक अन्य अधिकारी गोष्ठी के अधिकांश समय तक कुर्सी पर सोते ही रहे। जिससे लगता है कि उच्च स्तर के अधिकारियों की बैठक में इन्हें न तो जिला की फिक्र थी और न ही योजनाओं की।

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  • Web Title:Bundelkhand will create organic farming products market