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बारिश से गौशालाओं में पशुओं को परेशानी, संक्रमण फैलने का खतरा

जौनपुर। संवाददाता जिले में कोरोना काल के दौरान मानव जाति के जौनपुर। संवाददाता जिले में कोरोना काल के दौरान मानव जाति...

बारिश से गौशालाओं में पशुओं को परेशानी, संक्रमण फैलने का खतरा
हिन्दुस्तान टीम,जौनपुरThu, 20 May 2021 03:20 AM
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जौनपुर। संवाददाता

जिले में कोरोना काल के दौरान मानव जाति के साथ साथ गौशालाओं में रखे गए गायों की भी स्थिति बद से बदतर है। भूसा के अभाव में पेट भरने के लिए गायों को सूखा पुआल खाना पड़ रहा है। सफाई के अभाव में गायें बैठ नहीं पा रही है। कारण की गोबर व गंदगी में हुए बारिश के कारण काफी कीचड़ हो गया है। गोशालाओं व वहां की व्यवस्था को देख यही लगा कि छुट्टा पशुओं के साथ ज्यादती हो रही है।

जिले के 75 गौशालाओं में रखे गए 8460 गायें, बछड़ा व साड़ों को भूसा की जगह पुआल खाना पड़ रहा है। जबकि शासन की ओर से एक गाय के लिए तीस रुपया रोज भूसा का दिया जाता है। इसके बाद भी गायों को भूसा नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं लाखों रुपए का अब तक गाय के गोबर की खाद 68 रुपया कुंतल के हिसाब से बेची जा चुकी है। ‘हिन्दुस्तान ने पांच स्थान की पड़ताल की तो पाया कि शहर में होने के कारण कृषि भवन की गोशाला में स्थिति कुछ हद तक ठीक थी। बाकी जगहों पर तो गायों के साथ अत्याचार सरीखा काम प्रशासन कर रहा है। सबसे खराब स्थिति बक्शा की है। यहां तो गर्मी में धूप व अब बारिश में पानी के थपेरों को कमजोर गायें सहने को मजबूर हैं।

शहर के करीब होने का डर गोशाला में दिखा

जौनपुर। शहर के कृषि भवन में बनाए गए गोशाला में काफी संख्या में गोवंशों को रखा गया है। नगर पालिका के कर्मचारी बुधवार को कैमरा मैन को देख भले ही सफाई में जुट गए हो लेकिन बुधवार को पांच बजे तक नाद के पास की कीचड़, गोबर व गंदगी को देख इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह की सफाई हो रही है। भोजन के रूप में सिर्फ पुआल डाला गया था। गायों के बैठने के लिए कही भी समतल जमीन व सूखी जमीन नहीं दिखायी दी। जितनी गायें है उसमें से अधिकांश की पसली दिखायी दे रही थी।

बीमार गायों का डाक्टर के अभाव मेंं नहीं हो रहा उपचार

जौनपुर। स्थानीय विकास खण्ड के महर्षि अयोध्यादास स्थाई गोशाला सराययुसुफ में इस समय कुल 106 गोवंश हैं। पहले 130 थे। मौजूदा समय में पांच गाय काफी बीमार हैं लेकिन डाक्टर के अभाव में उनका उपचार नहीं हो पा रहा है। भूसा चारे के रूप में मिल रहा है। लेकिन गायों को देख कही से नहीं लग रहा था कि उन्हें भर पेट भूसा व चूना दिया जा रहा है। 106 गायों के लिए एक बोरी चूनी रखा हुआ दिखाया गया। बारिश के कारण गौशाल में चहुओर कीचड़ हो गया है। तीन गोपालकों पारसनाथ यादव, हरिशंकर यादव , राकेश गौतम की तैनाती है। व्यवस्थापक राजेन्द्र पटेल सेक्रेटरी हैं।

जीवन मौत से जूझ रहे क्षमता से डेढ़ गुना गोवंश

जौनपुर। बदलापुर क्षेत्र के मल्लूपुर गोशाला में दो सौ मवेशियों की क्षमता के सापेक्ष तीन सौ गोवंश बन्द हैं। उन्हें चारा पानी देने वाले कर्मी मजदूरी न मिलने के चलते भाग चुके हैं। गोशाला के संचालक सिकन्दर मौर्य किसी तरह पशुओं को चारा पानी दे रहे हैं। उनका आरोप है कि गोवंश के दाना की बात ही छोड़िये चारा(भूसा) का भुगतान भी समय से नहीं हो रहा है। मजदूर चार माह से मजदूरी न मिलने के कारण भाग चुके हैं। चिलचिलाती धूप में जानवरों को भारी समस्या से गुजरना पड़ रहा है। उपचार हेतु घनश्यामपुर के पशु चिकित्सक त्रिलोकीनाथ समय-समय पर आते रहते हैं। सुविधा के अभाव में प्रतिदिन एक दो गोवंश की मौत हो रही है।

भूसा की जगह पुआल परोसा जा रहा

जौनपुर। खुटहन ब्लाक के डिहियां स्थिति गोशाला की हकीकत सामने आई। गोवंश भीषण तपिश और गर्मी के बीच भूख से बिलबिला रहे हैं। पचास से अधिक संख्या में गोशाला में गोवंश खुले आसमान के नीचे पाए गए। खुले आसमान के नीचे गोवंशों को खिलाने के लिए कुछ पुआल जमीन पर फेक दिया गया था। गोशाला का आलम यह रहा कि गोशाला की खिलाने के लिए गोशाला में बनाए गए स्टोर में लगभग दो कुन्तल सड़ा भूसा शायद दिखाने के लिए रखा गया था। जिसे गायों को परोसा नहीं जा सकता था। पशुसेड के नीचे बनी चरनी खाली पड़ी हुई थी। मैदान में कुछ मात्र में पुआल पड़ा हुआ था।

पहले गर्मी व अब बारिश में भी खुले में रखी गयी गायें

जौनपुर। बक्शा विकास खण्ड के उमरक्षा गांव में बना गौशाला पूरी तरह बदहाल है। बेसहारा पशुओं को भीषण गर्मी में छांव नहीं है। धूप, बारिश में गौशाला में बाउंड्रीवाल न होने के कारण बाहर के दर्जनों बेसहारा पशु अंदर भ्रमण करतें रहते हैं। बक्शा विकास खण्ड के सादनपुर बीवीपुर, बसारतपुर, भटपुरा एवं उमरक्षा गांव में गौशाला बनवाया गया है। जिसमें सादनपुर बीवीपुर को छोड़कर अन्य तीनों गौशालाओं की स्थिति बेहद खराब है। उमरक्षा गांव में बना गौशाला बिना बाउंड्रीवाल के तथा खुले में बना है। गौपालक मंगरु ने बताया कि 44 पशु हैं जिसमें 11 का स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण छोड़ दिया हूं। एडीओ पंचायत विजय बहादुर धुरिया ने रटा-रटाया जवाब दिया।

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