होलिका दहन के साथ उड़ाने लगे अबीर-गुलाल

Mar 03, 2026 12:33 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जौनपुर
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Jaunpur News - फोटो.... 12, 13हे। युवक होलिका दहन करने के लिए सुबह से शाम तक लकड़ी, सरपत, पुआल आदि जुटाने में लगे रहे। महिलाएं दिनभर पापड़, चिप्स, गुलाब जामुन सहित अन्

होलिका दहन के साथ उड़ाने लगे अबीर-गुलाल

जौनपुर, संवाददाता। रंग पर्व होली की तैयारी में सोमवार को सभी लोग व्यस्त रहे। युवक होलिका दहन करने के लिए सुबह से शाम तक लकड़ी, सरपत, पुआल आदि जुटाने में लगे रहे। महिलाएं दिनभर पापड़, चिप्स, गुलाब जामुन सहित अन्य खाद्य सामग्री तैयार करने में व्यस्त रहीं। घर की साफ सफाई भी की गई। रात 11:53 बजे के बाद होलिका में अग्नि प्रविष्ट कराई गई। होलिका दहन होते ही लोग रंग गुलाल उड़ाना शुरू कर दिए। होलिका दहन स्थल पर जमकर फगुआ गायन और कबीरा हुआ। होलिका दहन के दिन सोमवार को भी बाजार गुलजार रहे। दोपहर बाद तक लोग बाजार में मिठाई, कपड़े, रंग-अबीर, गुलाल, पापड़, चिप्स आदि की खरीददारी किए।

युवक सुबह से देर शाम तक होलिका दहन के लिए लकड़ी, सरपत आदि जुटा कर होलिका को सजाने में जुटे रहे। शहर में कई स्थानों पर बच्चे चन्दा जुटाते देखे गए। सुबह से ही महिलाएं खाद्य सामग्री बनाने में जुटी रहीं। बड़ी बुजुर्ग महिलाएं सरसों का उबटन तैयार कर बच्चों, युवाओं और बहुजुर्गों को लगाकर उसकी लिज्झी एक जगह एकत्र कर रख रही थीं। जिसे रात में होलिका में डाला गया। मान्यता है कि उबटन लगाकर उसकी लिज्झी होलिका में डालने से रोग-व्याधि से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार होली को लेकर चारों ओर उत्साह का माहौल व्याप्त है। रंग खेलने का कार्य चार मार्च बुधवार को होगा। होलिका जलते ही शुरू हो गया रंग जौनपुर। परम्परानुसार होलिका दहन के तुरन्त बाद लोग रंग, अबीर-गुलाल उड़ाना शुरू कर देते हैं। सोमवार की रात 11 बजे गांवों में युवकों की टोली जिसमें बुजुर्ग भी शामिल रहे ढोल, मजीरा बजाते होलिका दहन स्थल की ओर चल दी। होलिका में अग्नि प्रवेश कराने के बाद लोग पहले होलिका के सात फेरे लगाए। फिर वहीं जमकर जोगीरा और कबीरा कहा जाने लगा। उसी बीच लोग एक दूसरे पर अबीर गुलाल फेंकने लगे। बहुत से उत्साही युवक चुपके से होलिका दहन में जुटे लोगों के सिर पर सूखा रंग छिड़क दे रहे थे। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में आधी रात के बाद तक होली का हुड़दंग मचा रहा। भद्रा के कारण होलिका दहन की तिथि में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने से कई जगहों पर मंगलवार को चन्द्र ग्रहण का मोक्ष होने के बाद होलिका दहन किया जाएगा। तत्पश्चात चार मार्च बुधवार को रंगोत्सव जिले भर में एक साथ मनाया जाएगा। --- कौमी एकता एवं साझा संस्कृति का रंग हमेशा रहा प्रभावी - शर्की काल में कवि-शायर लगाते थे होली की मौज मस्ती का दरबार - सारी परम्पराएं वर्तमान में होली मिलन समारोह में हो गई हैं परिवर्तित जौनपुर। मारकण्डेय मिश्र जौनपुर प्राचीन काल में यमदग्निपुरम व मध्यकालीन शर्की सल्तनत काल में शिराजे हिन्द के नाम से मशहूर था। यहां के कवियों-शायरों के साथ साथ होली के रंग में साझा संस्कृति और कौमी एकता का रंग हमेशा प्रभावी रहा है। पड़ोस में काशी तीर्थ होने के नाते यहां की होली की मौज में काशी का असर हमेशा दिखाई पड़ता है। कोतवाली चौराहा पर आज भी होली पर हिन्दू-मुस्लिम मिलकर कार्यक्रम करते हैं। चौदहवीं सदी में हुसैन शाह शर्की ने राग दरबारी की रचना की तो कवियों शायरों द्वारा होली की मस्ती का दरबार लगाया जाता था। कालान्तर में परिवर्तन होने के बाद अब यह परम्परा होली मिलन समारोह में तब्दील हो गई है। हुसैन शाह शर्की के दरबार में उन्ही का लिखा होरी गीत ‘बिरज में होली खेलैं रंग रसिया, राधे कान्ह एक रंग रंगि गयो नील रतन मन बसिया’ संगीत की धुन में गाया जाता था। तत्कालीन राजा जौनपुर हरिहर दत्त दुबे के जमाने में कवियों की मस्ती का फाग दरबार लगता था। यह परम्परा राजा यादवेन्द्र दत्त दुबे तक चली। उस समय के प्रख्यात चिकित्सक रहे डा.केदार नाथ सिंह के यहां होली पर महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन होता रहा। जिसमें कंकड़ जी या स्वप्निल जी को ताज पहनाते थे। उक्त कार्यक्रम में पं.रूप नारायण त्रिपाठी, डा.श्रीपाल सिंह क्षेम, कैलाश गौतम, सूड़ फैजाबादी, कृष्णकान्त एकलव्य, सभाजीत द्विवेदी प्रखर की विशेष भूमिका रहती थी। जब नाराज हो उठीं महिला नेता जौनपुर। एक संस्मरण के तहत व्यंग्य साहित्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर बताते हैं कि एक बार यहां होली पर महामूर्ख सम्मेलन में सूड़ फैजाबादी की एक उपमा पर एक महिला नेता नाराज हो गईं। सूंड़ ने नेता के चेहरे की तुलना गोभी के फूल से कर दी थी। गोरे गोरे मुखन पै जमी सड़क की धूल, उनका चेहरा यों खिला ज्यों गोभी का फूल। शहर में ओलंदगंज के होली हुड़दंग से लेकर कोतवाली चौराहा पर एक शाम होली के नाम सहित गली गलियारे और गांव गांव में होली के साहित्यिक आयोजन होते रहे हैं।

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