धान की नर्सरी के प्रति सजग रहें किसान : अधिकारी
जौनपुर में किसान धान की नर्सरी डाल रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह ने किसान को नर्सरी की देखभाल के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। बीज शोधन से रोगों से निजात पाने और उचित उपचार करने की बातें उठाई गई हैं।

जौनपुर। किसान इस समय धान की नर्सरी डाल रहे हैं। बहुत से किसान सांडा तैयार करने के लिए पहले ही नर्सरी डाल चुके हैं। ऐसे में किसान नर्सरी के प्रति सजग रहें। रोज क्यारी का अवलोकन करते रहे। रोग की आशंका दिखाई देते ही उपचार की व्यवस्था करें। यह सलाह किसानों को जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह दे रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि किसान खरीफ फसलों की बुवाई करने से पूर्व ट्राइकोडर्मा आठ ग्राम प्रति किग्रा बीज या कार्बण्डाजिम 2.5 ग्राम प्रति किग्रा बीज अथवा थीरम तीन ग्राम प्रति किग्रा से बीज शोधन अवश्य करें। वर्तमान समय में धान की नर्सरी में लगने वाले रोगों से बचाव के लिए उपचारात्मक कार्य करें।
नर्सरी का खैरा रोग
यह रोग जस्ते की कमी के कारण होता है। इसमें पत्तियां पीली पड़ जाती हैं जिस पर बाद में कत्थई रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। इसके उपचार के लिए जिंक सल्फेट पांच ग्राम तथा 20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिये।
धान की नर्सरी का सफेदा रोग
यह रोग लौह तत्व की अनुपलब्धता के कारण लगता है। नई पत्ती सफेद रंग की निकलती है जो कागज के समान होकर फट जाती है। उपचार के लिए फेरस सल्फेट पांच ग्राम तथा 20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर 2-3 छिड़काव पांच दिन के अन्तर पर करें।
बीज शोधन के बाद नर्सरी डालना सुरक्षित
किसान नर्सरी का अवलोकन सुबह शाम करते रहें। अन्यथा रोग की चपेट में आकर पूरी नर्सरी खराब हो जाएगी। जो किसान अभी नर्सरी डाल रहे हैं वो बीज शोधन के बाद नर्सरी डालें तो रोग की सम्भावना कम रहेगी। क्योंकि बीज शोधन करने से कम खर्च में ही फसल को रोगों से पूर्णतया निजात मिल जाती है।
- विनय सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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