शाम होते ही दीयों की रोशनी से जगमगा उठे घर-आंगन
Jaunpur News - फोटो....5 (सारी रात अंधेरा) के बावजूद अंधेरा फटक नहीं सका। ज्योति पर्व को लेकर लोगों में खास उत्साह रहा। सूर्यास्त होने से पूर्व घर के बीच आंगन में

जौनपुर, संवाददाता।दीप पर्व पर सोमवार को शाम होते ही घर आंगन जगमगा उठे। घरों के मुडेरों पर लगाए गए रंग बिरंगे दीप रोशनी बिखेरने लगे। देर रात कर दीयों का प्रकाश वातावरण को आलोकित करता रहा। घरों-प्रतिष्ठानों पर लटकाए गए कई रंगों के झालर शाम होते ही चमचमाने लगे। अमावस्या (सारी रात अंधेरा) के बावजूद अंधेरा फटक नहीं सका। ज्योति पर्व को लेकर लोगों में खास उत्साह रहा। सूर्यास्त होने से पूर्व घर के बीच आंगन में गाय के गोबर से लीपकर महिलाओं ने चौक पूरा। उसी चौक में ढ़ेर सारी मिट्टी की दीया, सरसों का तेल व देशी घी रखा गया।
घर की बड़ी बुजुर्ग महिलाएं उसी चौक में बैठकर दीयों में तेल डालकर जलाने लगीं। घर के बच्चे पूरे उत्साह से सभी कमरों, दरवाजों, मवेशियों की नांद, पशुशाला समेत घर और बाहर कोने-कोने में दौड़-दौड़ कर दीप रख रहे थे। दीप जलाने के बाद बच्चों ने मां सरस्वती की पूजा की। घरों में सरसों के तेल का दीपक जलाकर उसके ऊपर मिट्टी की घंटी या परई रखी गई जिससे दीया जलने से निकलने वाला कालिख उड़ न जाए। इसी कालिख से महिलाएं काजल बनाती हैं। इस प्रकार दीप पर्व दीपावली लोगों ने परम्परागत रूप से पूरे उत्साह पूर्वक मनाया। दीपावली पर्व पर घरों में रंगोली सजाई गई। युवतियों और महिलाओं ने विभिन्न रंगों एवं अबीर से दीवार तथा फर्श पर रंगोली सजाई। पर्व को लेकर चहुंओर उत्साह छाया रहा। दोपहर बाद तक होती रही खरीददारी जौनपुर। दीपावली के दिन भी दोपहर बाद तक बाजारों में लोग खराददारी करते रहे। मिठाई की दुकानों पर खरीददारों की सर्वाधिक भीड़ रही। हालत यह रही कि दोपहर बाद ही कई दुकानों से मिठाइयां उठ गई थीं। शाम को मिठाई खरीदने वालों को दिक्कत हुई। कई दुकानें झांकना पड़ा। इसके अलावा मोमबत्ती, लाई, चूरा, चीनी की मिठाई जो विभिन्न आकारों की बनी थी लोगों ने खरीदा। बहुत से लोगों ने आज लक्ष्मी गणेश की मूर्ति खरीदा। इस प्रकार दीपावली के दिन भी लोगों ने जमकर खरीददारी की। इसके चलते ओलंदगंज स्थित फल वाली गली, चहारसू चौराहा, कोतवाली चौराहा, लाइन बाजार आदि स्थानों पर काफी भीड़ भाड़ रही। घर-घर बनी सूरन की सब्जी जौनपुर। दीपावली के दिन सोमवार को घर घर सूरन की सब्जी बनाई गई। इस दिन सूरन की सब्जी खाना आवश्यक माना जाता है। हिन्दू धर्मावलम्बियों के लिए यह परम्परा बन गई है। दीपावली से पूर्व ही लोग बाजार से सूरन खरीदकर ले आते हैं। वैसे अधिकांश लोग गले में खुजली होने के डर से बाहर से आए सूरन की सब्जी प्रयोग करते हैं। जबकि बड़े बुजुर्गों के अनुसार घर पैदा हुए देशी सूरन की सब्जी खाना चाहिए। दीपावली के दिन सूरन की सब्जी खाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। जमकर हुई फूल माला की खरीददारी जौनपुर। दीपावली के मौके पर पूजा पाठ करने के लिए सोमवार को दोपहर बाद तक लोगों ने फूल माला की खरीददारी की। वाजिदपुर तिराहा, ओलंदगंज, पालिटेक्निक चौराहा, चहारसू चौराहा, कोतवाली चौराहा, लाइन बाजार, कलेक्ट्री कचहरी के पास फूल माला की दुकानें लगी थीं जहां लोग खरीददारी कर रहे थे। दुकानदारों ने बताया कि लाल और सफेद फूल की बिक्री अधिक हुई। ज्यादातर लोगों ने 108 पंखुड़ी युक्त कमल का फूल खरीदा। सभी स्थानों पर सुबह पांच बजे से शाम तक दुकानें खुली रहीं। पूजा पंडालों में किया मां लक्ष्मी का दर्शन फोटो.. जौनपुर। जिले भर में जगह जगह स्थापित पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं ने दीपावली के दिन सोमवार को मां लक्ष्मी का दर्शन पूजन किया। सभी पंडालों में सुबह मां का दर्शन पूजन करने वालों की भीड़ रही। शाम की आरती में भी लोग शामिल हुए। पंडालों में रात को मां की विशेष पूजा अर्चना होगी। शहर और ग्रामीण बाजारों में मिलाकर करीब 60 स्थानों पर पंडाल सजाया गया है। श्री लक्ष्मी पूजा महासमिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार जायसवाल और महासचिव संतोष यादव ने बताया कि 18 अक्तूबर से स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन 22 अक्तूबर को विसर्जन घाट नखास पर बने शक्ति कुण्ड में किया जायेगा। नगर में नखास, जोगियापुर, नईगंज, जगदीशपुर, सिपाह, पचहटियां, अहियापुर, ईशापुर, बंगाली कालोनी सहित अन्य स्थानों पर पण्डाल सजाकर मूर्ति स्थापित की गई है। सभी पंडालों में पूजन-अर्चन चल रहा है। सुबह-शाम आरती से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। भोरहरिया मेला में खरीदा मिट्टी का बर्तन जौनपुर। शहर के मानिक चौक पर सोमवार को तीसरे दिन भोरहरिया मेला में मिट्टी के बर्तनों की जमकर बिक्री हुई। यह मेला करीब सौ वर्ष से दीपावली के मौके पर लगाया जाता है। यह मेला धनतेरस, छोटी दीपावली और दीपावली के मौके पर तीन दिन लगता है। खास यह कि इस मेले का आयोजन रात दो बजे से लेकर सुबह छह बजे तक होता है। इसी लिए यह भोरहरिया मेला के नाम से जाना जाता है। मेले में रंग बिरंगे मिट्टी के बर्तन बिकते हैं। लोग पूजा पाठ के लिए मिट्टी की दीया, घरिया, घंटी, परई, हड़िया के अलावा मिट्टी के बने खिलौने खरीद कर घर ले जाते हैं।

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