अजब-गजब! शोरूम से निकलने के पांच साल पहले ही कट गया चलान

Feb 28, 2026 12:34 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जौनपुर
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Jaunpur News - - जौनपुर परिवहन विभाग और यातायात विभाग की कार्यशैली पर उठे सवालका है तो थोड़ा आश्चर्य जरूर होगा। होना भी चाहिए, क्योंकि जब आपने गाड़ी ली ही थी नहीं और

अजब-गजब! शोरूम से निकलने के पांच साल पहले ही कट गया चलान

जौनपुर, कार्यालय संवाददाता। आप नई बाइक या कार खरीदते हैं और कुछ दिन के बाद पता चलता है कि जो नंबर आपको मिला उसपर पांच साल पहले चालान हो चुका है तो थोड़ा आश्चर्य जरूर होगा। होना भी चाहिए, क्योंकि जब आपने गाड़ी ली ही थी नहीं और उस सीरीज का नंबर बाजार में आया ही नहीं था तो फिर चालान कैसे कटा? सवाल भले बड़ा हो, लेकिन परिवहन विभाग और यातायात पुलिस सबकुछ असंभव को भी संभव बना सकता है। ताजा मामला जौनपुर का है। यहां कुछ इसी तरह का मामला हुआ है। गाड़ी शोरूम से बाहर निकलने के पांच साल पहले ही उसपर आठ सौ रुपये का चालान कट गया था।

मजे की बात तो यह कि जिस उप निरीक्षक ने चालान काटा वह वाकई इतना दिमांग का तेज था कि भविष्य में किस गाड़ी को कौन सा नंबर मिलेगा यह भी पता कर लिया था। मड़ियाहूं निवासी राजेंद्र प्रसाद की की पुत्री अंजू सिकरारा क्षेत्र में शिक्षक हैं। नवंबर 2025 में उन्होने अपने नाम पर एक बुलेट का लेटेस्ट वैरिएंट खरीदी। उनका दावा है कि नवंबर में ही उन्हें गाड़ी का नंबर यूपी 62 डीजे 0401 नंबर अलॉट हुआ। कुछ दिन के बाद वह ऑनलाइन चेक कीं तो पता चला कि उनके वाहन पर तो आठ सौ रुपये का चालान है। गहनता से पता करने पर जानकारी मिली कि जुलाई 2020 में ही इस नंबर के बुलेट पर चालान काटा जा चुका है। चलान सिकरारा और मड़ियाहूं में बल्कि तेजी बाजार इलाके में हुआ। हालांकि जब अधिकारियों के संज्ञान में मामला पहुंचा तो आनन फानन में चलान की धनराशि जमा करा दी गई। कैसे पता चला यह नंबर बुलेट को ही मिलेगा शोरुम से वाहन निकलने के पहले चालान कटने के मामले से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह कि जिस उप निरीक्षक ने 2020 में वाहान का चालान काटा उसे आखिर यह कैसे पता चला कि भविष्य में इस नंबर की गाड़ी बाइक ही होगी। मामले की जानकारी होने के बाद परिवहन विभाग के लोग भी स्तब्ध हैं कि आखिर ऐसी चूक कैसे हो सकती है। मजे की बात यह है कि जिस समय का चालान दिखाया जा रहा है उस समय के ही तत्कालीन दरोगा का नाम चालान वाले अभिलेखों में दिख रहा है। पीड़ित ने उठाया सवाल, नंबर अस्तित्व में नहीं तो कैसे कटा चलान पीड़ता अंजू ने कहा कि जिस समय कथित चालान की तारीख दर्ज है, उस समय यह वाहन अस्तित्व में ही नहीं था। गाड़ी का निर्माण और पंजीकरण वर्ष 2024-2025 में हुआ है, ऐसे में पांच साल पुराना चालान किस आधार पर जोड़ा गया यह बड़ा सवाल है। उन्होंने बताया कि डीलरशिप से वाहन खरीदते समय किसी भी प्रकार का लंबित चालान या पूर्व रिकॉर्ड नहीं बताया गया। पंजीकरण भी नए सिरे से हुआ। इसके बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर पुराने वर्ष का चालान दिखना समझ से परे है। ऑनलाइन चालान यातायात पुलिस काटती है। यह मामला उन्हीं के स्तर का है। - सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ-जौनपुर

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