
जेल सुपरिटेंडेंट को बेटी के लिए कंसल्टेंसी का सहारा लेना पड़ा भारी, शातिरों के चंगुल में फंसे
जिला कारागार अधीक्षक ने बताया कि नीट काउंसिलिंग के द्वारा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए सहयोग प्रदान करने के लिए एक कंसल्टेंसी के प्रोपराइटर अभिनव शर्मा से जस्ट डायल के माध्यम से सम्पर्क किया था। उन्हें हिन्द मेडिकल कॉलेज सफेदाबाद बाराबंकी में प्रवेश सुरक्षित कराने का आश्वासन दिया गया।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में जेल के अधीक्षक को ठगों ने निशाना बनाया है। बेटी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने के लिए कंसल्टेंसी का सहारा लेना उन्हें भारी पड़ गया। शातिरों के चंगुल में फंसकर जेल अधीक्षक ने 50 लाख रुपये गंवा दिए। इधर, दाखिला न होने से उनकी बेटी का एक साल भी खराब हो गया। जेल अधीक्षक की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
जिला कारागार अधीक्षक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि नीट काउंसिलिंग के द्वारा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए सहयोग प्रदान करने के लिए एक कंसल्टेंसी के प्रोपराइटर अभिनव शर्मा से जस्ट डायल के माध्यम से सम्पर्क किया था। उन्हें हिन्द मेडिकल कॉलेज सफेदाबाद बाराबंकी में प्रवेश सुरक्षित कराने का आश्वासन दिया गया।
इसके लिए उनसे हिन्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के नाम पर दो बैंक ड्राफ्ट 10-10 लाख रुपये के आईसीआईसीआई बैंक में गत वर्ष 18 और 19 जुलाई को जमा कराए गए। इसके बाद 24 सितंबर को उनके बताये कोटक महिन्द्रा बैंक विभव खण्ड गोमती नगर लखनऊ के खाते में तीस लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से जमा किए।
कुछ दिन बाद अभिनव शर्मा से बेटी के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए सम्पर्क किया तो उनका मोबाइल नंबर बंद मिला। इससे जेल अधीक्षक को शक हुआ। उन्होंने अभिनव शर्मा की तलाश कराई तो उनका कार्यालय जो कि थर्ड फ्लोर बी-3/10 विजयंत खण्ड गोमती नगर लखनऊ में है, वो भी बंद मिला। पड़ताल में पता चला कि अभिनव शर्मा और संतोष कुमार साठगांठ कर संगठित गिरोह बनाए हैं। जेल अधीक्षक की तहरीर पर कंसल्टेंसी के प्रोपराइटर अभिनव शर्मा, संतोष कुमार और जस्ट डायल संचालक-प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले की गहनता से जांच की जा रही है। जांच में जो भी बातें सामने आएंगी उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।





