दुर्भाग्य है धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा; स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गौ रक्षा यात्रा का शंखनाद
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर काशी से लखनऊ के लिए रवाना हुए। उन्होंने इसे “गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध” बताया। यात्रा 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी, जहां संतों की सभा होगी। शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए अब धर्मयुद्ध शुरू हो चुका है

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर काशी से लखनऊ के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। शनिवार को काशी से रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि अपने ही देश में, अपने ही वोट से चुनी हुई सरकार के सामने गौमाता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध करना पड़ रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि अब धर्मयुद्ध शुरू हो चुका है। जिस जिले से यह यात्रा गुजरेगी, वहां के सांसद और विधायक को यह बताना होगा कि वे गौमाता के पक्ष में हैं या विरोध में।
11 मार्च को लखनऊ में जनसभा करेंगे
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी गौमाता की रक्षा चाहते हैं और इस धर्मयुद्ध में समाज के सभी वर्ग जुड़ रहे हैं। उन्होंने इस अभियान को “गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा” का नाम दिया है। शंकराचार्य 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे, जहां हजारों संतों की मौजूदगी में बड़ी सभा आयोजित की जाएगी। इस सभा में सरकार से गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की जाएगी।
माघ मेले में जिस पालकी को रोका, उसी में सवार हुए
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन्होंने 30 जनवरी को उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि अगर सरकार गाय को राष्ट्रमाता घोषित नहीं करती है तो आंदोलन किया जाएगा। अब उसी क्रम में यह यात्रा शुरू की गई है। शंकराचार्य माघ मेले में जिस पालकी को रोके जाने को लेकर चर्चा में आए थे, उसी पालकी पर सवार होकर इस यात्रा पर निकले हैं। यात्रा शुरू करने से पहले उन्होंने गौशाला पहुंचकर गाय की पूजा की।
गौ प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध यात्रा का शंखनाद
इसके बाद चिंतामणि गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर संकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। शंखनाद और जयकारों के बीच वे अपनी वैनिटी वैन से लखनऊ के लिए रवाना हुए। यह यात्रा काशी से जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई और सीतापुर होते हुए करीब पांच दिन में लखनऊ पहुंचेगी। यात्रा में 20 से अधिक गाड़ियां शामिल हैं और लगभग 500 श्रद्धालु उनके साथ चल रहे हैं। रास्ते में लोगों को पोस्टर भी बांटे गए, जिन पर लिखा है- “जिंदा हिंदू लखनऊ चलें।”
डिप्टी सीएम के बयान पर दी प्रतिक्रिया
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह सही समय है जब लोग अपनी बात खुलकर कहें। जो गौमाता के पक्ष में हैं, वे बोल रहे हैं। जो लोग हिम्मती हैं, वे खुलकर कहेंगे कि वे गाय के समर्थन में हैं, जबकि जो लोग अंदर से विरोध में हैं, वे कुछ नहीं बोलेंगे। उन्होंने कहा कि 11 मार्च को लखनऊ में साधु-संतों की बड़ी सभा में इस आंदोलन की दिशा तय की जाएगी और यह भी बताया जाएगा कि इस अभियान में कौन-कौन लोग उनके साथ खड़े हैं।


