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बीजेपी के लिए यूपी में SIR की कौन सी बात बनी चुनौती? पार्टी नए सिरे से ऐक्टिव; अब इस पर फोकस

बीजेपी के लिए यूपी में SIR की कौन सी बात बनी चुनौती? पार्टी नए सिरे से ऐक्टिव; अब इस पर फोकस

संक्षेप:

एसआईआर को लेकर यदि निर्वाचन आयोग ने तिथि आगे न बढ़ाई तो 16 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची का प्रकाशन होना है। ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन होते ही पार्टी नये नाम जुड़वाने, दावा और आपत्तियों पर पूरा फोकस करेगी। खासतौर से हारी हुई सीटों पर पार्टी की खास निगाह है।

Dec 11, 2025 05:55 am ISTAjay Singh विशेष संवाददाता, लखनऊ
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SIR in Uttar Pradesh : भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए जा रहे मतदाता गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अब माना जा रहा है एसआईआर की कुछ चीजें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चुनौती बन सकती हैं। खासतौर से लोगों का अपना वोट शहर के बजाए गांव में रखना ज्यादा पसंद करना। शहर में रहने वाले और साल में एक-दो बार ही गांव जाने वाले कई मतदाता अपना कनेक्ट बनाए रखने के लिए वहीं के वोटर बने रहना चाहते हैं। ऐसा माना जाता है कि शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बीजेपी को वोट करते हैं। ऐसे में लोगों का शहर की बजाए गांव में ही अपना वोट रखना और शहरी मतदाताओं द्वारा फार्म लेकर जमा न करने से बीजेपी नेताओं को चिंता हो रही है कि कहीं शहरी क्षेत्रों में उनके जमे-जमाए समीकरणों पर असर न पड़ जाए। ऐसे में बीजेपी ने एसआईआर पर अभी और ताकत झोंकने का निर्णय लिया है।

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ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन होते ही पार्टी नये नाम जुड़वाने, दावा और आपत्तियों पर पूरा फोकस करेगी। खासतौर से हारी हुई सीटों पर पार्टी की खास निगाह है। एसआईआर को लेकर यूपी सहित अन्य राज्यों में पार्टी स्तर पर अब तक हुए काम और आगामी रणनीति को लेकर मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने दिल्ली में समीक्षा की।

ड्राफ्ट सूची का प्रकाशन होते ही बीजेपी करेगी ये काम

एसआईआर को लेकर यदि निर्वाचन आयोग ने तिथि आगे न बढ़ाई तो 16 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची का प्रकाशन होना है। भाजपा की समीक्षा बैठक में पूरा फोकस आगामी रणनीति पर रहा। पार्टी नेताओं को ड्राफ्ट सूची का प्रकाशन होते ही फार्म-6, 7 व 8 भरवाने पर पूरा फोकस करने को कहा गया है। दरअसल, बहुत बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहे जबकि एसआईआर के गणना प्रपत्र में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर डिटेल भरना है। ऐसे सभी वंचित लोगों के फार्म-6 भरवाकर नया वोटर बनाया जाएगा। इसके अलावा 18 साल के होने वाले नये युवाओं पर भी पार्टी की नजर है।

हारी हुई सीटों पर पार्टी की खास नजर

एसआईआर का बड़ा प्रभाव शहरी सीटों पर पड़ रहा है। देहात की पृष्ठभूमि से जुड़े तमाम लोग अपने गांव में ही गणना प्रपत्र भर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा शहर में कम प्रपत्र भरे गए हैं। सीटों की डेमोग्राफी के साथ ही हारी हुई सीटों पर पार्टी की विशेष नजर है। खासतौर से प्रदेश के महानगरों पर पूरी ताकत लगाई जा रही है। पार्टी विधायकों, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से सब काम छोड़कर अगले एक महीने तक नये नाम जुड़वाने और फर्जी नाम हटवाने पर पूरी ताकत झोंकने को कहा गया है।

प्रदेश महामंत्री संगठन ने की एसआईआर पर बैठक

इस बैठक में भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन के साथ ही प्रदेश में एसआईआर का काम देखने के लिए प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला के संयोजन में बनाई गई चार सदस्यीय समिति ने भाग लिया। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल व संजीव शर्मा शामिल थे। महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने बुधवार को भी राजधानी के विधायकों सहित अन्य लोगों के साथ एसआईआर को लेकर बैठक की।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh
अजय कुमार सिंह दो दशक से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और टीवी होते हुए अब डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ीं खबरों को गहराई से कवर किया है। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं। और पढ़ें
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