ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, प्लास्टिक की छोटी यूनिटों में उत्पादन ठप; रोजगार पर संकट

Ajay Singh अजय श्रीवास्तव, गोरखपुर
share

युद्ध से पहले जीएसटी सहित 112 रुपये प्रति किलो में मिलने वाला प्लास्टिक दाना इस समय 188 रुपये में मिल रहा है। ऐसे में बर्तन धोने वाले साबुन के लिए बनने वाले प्लास्टिक के कप की लागत 5.50 रुपये से बढ़कर 9 रुपये तक पहुंच गई है। आधा दर्जन यूनिटें पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।

ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, प्लास्टिक की छोटी यूनिटों में उत्पादन ठप; रोजगार पर संकट

UP News: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण जंग का असर गोरखपुर में गीडा से लेकर इंडस्ट्रियल एरिया की प्लास्टिक आधारित फैक्ट्रियों पर पड़ रहा है। गीडा से लेकर इंडस्ट्रियल एरिया की दर्जन भर छोटी यूनिटों में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। वहीं बड़ी यूनिटों में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित है। यह फैक्ट्रियां बमुश्किल 30 से 40 फीसदी क्षमता से चल रही हैं। ऐसे में फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों के रोजगार पर भी संकट की स्थिति है। हालांकि उद्यमियों का कहना है कि फिलहाल मजदूरों दूसरे कामों में लगाकर भुगतान किया जा रहा है।

गीडा से लेकर इंस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक बोरा बनाने वाली तीन बड़ी यूनिटें हैं। तीनों यूनिटें कच्चा माल के लिए प्रयोग की जाने वाली प्लास्टिक दाना की किल्लत से जूझ रही हैं। युद्ध शुरू होने से पहले 80 से 85 रुपये प्रति किलो बिकने वाला ए ग्रेड का प्लास्टिक दाना इस समय 170 रुपये के पार पहुंच गया है।

Voice of UP 🎤: यूपी का सबसे बड़ा Talent Contest— Register करो, talent दिखाओ ✨ Download App

प्लास्टिक वस्तुओं का जॉब वर्क लेने वाले अजय कुमार बताते हैं कि युद्ध से पहले जीएसटी सहित 112 रुपये प्रति किलो में मिलने वाला प्लास्टिक दाना वर्तमान में 188 रुपये में मिल रहा है। ऐसे में बर्तन धोने वाले साबुन के लिए बनने वाले प्लास्टिक के कप की लागत 5.50 रुपये से बढ़कर 9 रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में आधा दर्जन यूनिटें पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।

फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित होने से बैंक से ऋण लेने वाले उद्यमियों की स्थिति नाजुक हो गई है। उद्यमियों का कहना है कि बिजली का बिल और बैंक की ईएमआई पर कोई असर नहीं हुआ है। ऊपर से गीडा की तरफ से निरस्तीकरण को लेकर मिला नोटिस सिरदर्द बना हुआ है। इसी तरह पानी का बोतल बनाने वाली यूनिटें भी प्रभावित हो रही है। एक लीटर वाला जो बोतल 5.5 रुपये में तैयार होता था, उसकी कीमत 7 रुपये तक पहुंच गई है। प्लास्टिक का बोरा बनाने वाले उद्यमी भोला जायसवाल का कहना है कि प्लास्टिक दाना कई ग्रेड में आता है। बोरा बनाने के लिए दाना 150 रुपये किलो मिल रहा है। बढ़ी हुई कीमतों के साथ नया ऑर्डर लेने की मजबूरी है।

री-साइकिल कर उत्पादन करने वाली यूनिटें चल रहीं

कबाड़ प्लास्टिक को री-साइकिल कर बाल्टी, मग, गमला आदि बनाने वाली यूनिटें काफी हद तक संचालित हो रही हैं। ऐसी ही यूनिट को संचालित करने वाले उद्यमी का कहना है कि कबाड़ में प्लास्टिक की कीमत बढ़ गई है। इसके बाद भी प्रोडक्शन कास्ट में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। गीडा में री-साइकिल कर बनने वाली कुर्सियों से सैकड़ों लोग जुड़े हुए हैं।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।