
हेल्थ इंश्योरेंस से फर्जी भुगतान की जांच तेज, चार और नर्सिंग होमों के ईमेल पुलिस को मिले
पुलिस ने डिसेंट अस्पताल के संचालक शमशुल और उसके पार्टनर प्रवीण उर्फ विकास त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था। इन दोनों से पता चला था कि गोरखपुर और बस्ती के डिसेंट अस्पताल में 15 लोगों का इसी तरह से फर्जीवाड़ा करके 1.20 करोड़ रुपये की जालसाजी की गई है।
Fake Health Insurance: यूपी के गोरखपुर के तारामंडल और बस्ती में स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में फर्जी हेल्थ इंश्योरेंस की जांच कर रही पुलिस को चार और नर्सिंग होम के खिलाफ सबूत मिले हैं। डिसेंट के मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद मिले कंप्यूटर से चार अलग-अलग नर्सिंग होमों के मेल मिले हैं, जिसके लिए इंश्योरेंस के लिए दस्तावेज भेजे गए हैं। यह भी पता चला है कि कंप्यूटर से डाटा डिलीट करके सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई है। हालांकि, पुलिस ने कुछ फाइलों को रिकवर करा लिया है और कई रिकवर किए जा रहे हैं। खबर है कि पुलिस जल्द अन्य नर्सिंग होमों पर भी कार्रवाई कर सकती है।

दरअसल, बजाज आलियांस फाइनेंस कंपनी ने पुलिस में शिकायत की थी कि दिल्ली के रहने वाले सत्यदीप के नाम पर फर्जी तरीके से एक लाख 80 हजार रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस का भुगतान हुआ है। जबकि जांच में पता चला है कि वह अस्पताल में कभी आए ही नहीं थे। इसकी पुष्टि खुद सत्यदीप ने की थी।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने डिसेंट अस्पताल के संचालक गेहूंसागर निवासी शमशुल व उसके पार्टनर प्रवीण उर्फ विकास त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था। इन दोनों से पता चला था कि गोरखपुर और बस्ती के डिसेंट अस्पताल में 15 लोगों का इसी तरह से फर्जीवाड़ा करके 1.20 करोड़ रुपये की जालसाजी की गई है। शनिवार को पुलिस ने इसमें शामिल कथित डॉक्टर और गगहा के नर्रे निवासी अफजल व मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनसे पूछताछ में पता चला है कि जिस एपेक्स अस्पताल में मरीजों का फॉलोअप दिखाया गया था, वह अस्तित्व में ही नहीं है। वहीं डिसेंट हॉस्पिटल के रिकार्ड में भी कई संदेहास्पद फाइलें मिलीं। अब पुलिस को कंप्यूटर से दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
संतकबीरनगर के नर्सिंग होमों से मांगे गए दस्तावेज
जांच कर रही पुलिस ने संतकबीरनगर के तीन नर्सिंग होमों से दस्तावेज मांगे हैं। मरीजों का नाम भेजकर पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। ताकि, यह पुष्टि हो सके कि उनके यहां पर मरीज भर्ती हुए थे या फिर डिसेँट की तरह ही फर्जीवाड़ा किया गया है। अब पुलिस की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है।
क्या बोली पुलिस
गोरखपुर के एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि पुलिस को चार नर्सिंग होम के ईमेल मिले हैं। इसके आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क में शामिल सभी आरोपितों पर कार्रवाई की जाएगी।





