
प्राकृतिक उत्पादों को लेकर रिसर्च पर BHU में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, छात्रों ने सीखे शोध के गुर
आयोजन सचिव डॉ. सचि सिंह ने तकनीकी सत्रों व शोध प्रस्तुतियों की विस्तृत रिपोर्ट दी जबकि डॉ. राकेश पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर सर्वश्रेष्ठ मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुति के लिए पुरस्कार भी वितरित किए गए।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के महिला महाविद्यालय में प्राकृतिक उत्पादों पर आधारित शोध के वर्तमान रुझानों पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन 11 दिसंबर को हुआ। मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में वनस्पति विज्ञान एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन 9 दिसंबर को कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने किया था। समापन सत्र महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को पुष्पांजलि, दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय कुलगीत से शुरू हुआ, जिसे संगीत विभाग की डॉ. श्वेता कुमारी की टीम ने प्रस्तुत किया।

महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रीता सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। संयोजक डॉ. राजीव मिश्रा ने सभी विद्वानों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि एवं एमेरिटस वैज्ञानिक प्रो. डीके उप्रेती (पूर्व निदेशक, CSIR–NBRI, लखनऊ) ने समापन भाषण में प्राकृतिक उत्पादों के शोध के बढ़ते दायरे और बहु-विषयी महत्व पर जोर देते हुए सहयोगात्मक शोध की भविष्य में निर्णायक भूमिका बताया। आयोजन सचिव डॉ. सचि सिंह ने तकनीकी सत्रों व शोध प्रस्तुतियों की विस्तृत रिपोर्ट दी जबकि डॉ. राकेश पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर सर्वश्रेष्ठ मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुति के लिए पुरस्कार भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में कौन-कौन हुआ शामिल
सम्मेलन में अमेरिका, थाईलैंड, कजाखस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, इज़राइल व जिम्बाब्वे सहित कई देशों के विशेषज्ञों के अलावा भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों ने भाग लिया। विदेशी प्रतिभागियों में डॉ. अचरन एस नरूला, प्रो. विभव तिवारी, प्रो. गुयेन किम ओआन्ह, डॉ. एशर बर-टल एवं डॉ. स्टीफन नियॉनी प्रमुख रहे, जबकि भारतीय वैज्ञानिकों में डॉ. सुदेश कुमार यादव, डॉ. राकेश मौर्य, प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी एवं प्रो. सूर्य प्रताप सिंह आदि ने अपने नवीनतम शोध प्रस्तुत किए। तीन दिनों तक चले इस आयोजन ने प्राकृतिक उत्पादों के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की नई संभावनाएं खोलीं।



