
वाराणसी से इंडिगो ने कैंसिल कर दीं छह फ्लाइटें, लेटलतीफी भी जारी, किराया भी बढ़ा
बाबतपुर एयरपोर्ट पर बुधवार की देर शाम आने वाली इंडिगो की छह फ्लाइटें कैंसिल कर दी गईं हैं। इनमें दिल्ली का 6 ई 6742 और 6 ई 2231, मुम्बई का 6 ई 372 और 6 ई 6570, हैदराबाद का 6 ई 432 तथा बेंगलुरु का 6 ई 353 विमान शामिल हैं।
बाबतपुर एयरपोर्ट पर बुधवार की देर शाम आने वाली इंडिगो की छह फ्लाइटें कैंसिल कर दी गईं हैं। इनमें दिल्ली का 6 ई 6742 और 6 ई 2231, मुम्बई का 6 ई 372 और 6 ई 6570, हैदराबाद का 6 ई 432 तथा बेंगलुरु का 6 ई 353 विमान शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक यात्रियों को इसकी पहले सूचना दे दी थी। बाबतपुर एयरपोर्ट पर लगातार नौ दिनों से इंडिगो एयरलाइंस देर शाम से रात तक आने वाली उड़ानें को रोज रद्द कर दे रही है।
वहीं, विभिन्न महानगरों से दिन में आने वाले विमान भी प्रतिदिन काफी लेट पहुंच रहे हैं। दोनों कारणों से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। बुधवार सुबह पुणे से आने वाला पहला इंडिगो का विमान अपने निर्धारित समय से 50 मिनट विलम्ब से वाराणसी पहुंचा। उधर, पिछले दिनों पायलटों की हड़ताल से निरस्त हुए विमानों के यात्रियों को रिफंड मिलने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
कनेक्टिंग फ्लाइट का किराया 35 हजार तक
सरकार की लाख कोशिशों और विमानन नियामक संस्थाओं की चेतावनियों के बावजूद विमान कंपनियां यात्रियों से भारी किराया वसूलने से बाज नहीं आ रही हैं। खासतौर पर इंडिगो की उड़ानों में हालिया व्यवधान के बाद अन्य एयरलाइंस ने किराया इतनी तेजी से बढ़ा दिया है कि आम यात्री अब बेंगलुरु जैसी प्रमुख शहरों तक पहुंचने के लिए भारी खर्च करने को मजबूर हैं।
मुम्बई के लिए अकासा एयर की टिकटें अब 19 से 20 हजार रुपये तक पहुंच गई हैं, जबकि स्पाइसजेट और एयर इंडिया की दिल्ली उड़ानों का किराया 8,500 रुपये से बढ़कर 10,000 रुपये हो गया है। चेन्नई की स्पाइसजेट उड़ानों के लिए यात्रियों को 23,000 से 30,000 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। साथ ही, बेंगलुरु की सीधी उड़ानों की सीटें अगले कई दिनों तक पूरी तरह बुक हैं, जिससे यात्रियों के पास विकल्प सीमित हो गए हैं। इस स्थिति में, कई यात्री बेंगलुरु पहुंचने के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट का सहारा ले रहे हैं। लेकिन यह विकल्प भी सस्ते में नहीं है।
कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए बेंगलुरु जाने का किराया अब 35,000 रुपये तक पहुंच गया है, जो आम यात्री की पहुंच से कहीं ऊपर है। विशेषज्ञों का कहना है कि विमान कंपनियों का भारी किराया वसूली का सिलसिला यात्रियों के लिए चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि सरकार और विमानन नियामक संस्थाएं समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठातीं, तो आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा महंगी और मुश्किल होती जा सकती है। यात्रियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में वे मजबूरन महंगे टिकट खरीदने को तैयार हैं, क्योंकि उनके पास विकल्प सीमित हैं और समय पर पहुंचना जरूरी है।





