यूपी में आयकर विभाग का कारनामा, मजदूर के बाद अब ऑटो चालक को भेजा 38.50 करोड़ का नोटिस
हरदोई जिले से एक बार फिर अजब-गजब मामला सामने आया है। दो महीने पहले मजदूर को नोटिस भेजने के बाद अब अतरौली थाना क्षेत्र के ग्राम गंजहाखेड़ा मजरा कुकुरा में आयकर विभाग ने एक ऑटो चालक को 38.50 करोड़ रुपये के लेन देन और उसका आयकर रिटर्न न भरने का नोटिस जारी कर दिया।

यूपी के हरदोई जिले से एक बार फिर अजब-गजब मामला सामने आया है। दो महीने पहले मजदूर को नोटिस भेजने के बाद अब अतरौली थाना क्षेत्र के ग्राम गंजहाखेड़ा मजरा कुकुरा में आयकर विभाग ने एक ऑटो चालक को 38.50 करोड़ रुपये के लेन देन और उसका आयकर रिटर्न न भरने का नोटिस जारी कर दिया। नोटिस देख ऑटो चालक के होश उड़ गए। अब वह ऑफिसों के चक्कर लगाने को मजबूर है।
अतरौली थाना क्षेत्र के गांव गंजहाखेड़ा निवासी 52 वर्षीय रामपाल ने बताया कि कुछ दिन पहले गांव के टेलर रजनीश को डाकिया मेरे नाम की एक चिट्ठी दे गया था। टेलर ने यह चिट्ठी मुझे दी। इसे जब खोल कर देखा तो यह आयकर विभाग का नोटिस था। इसमें 38.50 करोड़ रुपये के लेन-देन और उसका इनकम टैक्स रिटर्न न भरने का जिक्र था। नोटिस से परेशान रामपाल ने हाईकोर्ट के एक वकील से संपर्क साधा और मामले की जानकारी दी। वकील ने पैन कार्ड से डिटेल निकलवाई तो पता चला कि सत्र 2023-24 में 7.50 करोड़ और सत्र 2024-25 में 31 करोड़ का लेनदेन हुआ है। रामपाल ने बताया कि तीन साल पहले दिल्ली में उसका मोबाइल फोन चोरी हो गया था। मोबाइल में पैन कार्ड, आधार कार्ड की फोटो थीं। लगता है इसी का गलत उपयोग किया गया है। रामपाल के अनुसार वह दिल्ली में साल से ऑटो रिक्शा चला रहा है। उसके पास एक बीघा खेती है। इतने रुपये तो उसने कभी देखे भी नहीं हैं, जितने का नोटिस भेज दिया गया है।
दो महीने पहले आयकर विभाग ने मजदूर को भेजा था नोटिस
यूपी में मजदूरों को आयकर विभाग द्वारा नोटिस भेजे जाने का कोई पहला मामला नहीं है। बीते जनवरी महीने में माधौगंज थाना क्षेत्र के ग्राम रूदामऊ निवासी गोविन्द कुमार को आयकर विभाग की ओर से 7 करोड़ 15 लाख 92 हजार 786 रुपये का नोटिस भेजा गया था। गोविन्द कुमार ने बताया था कि वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता है और इतनी बड़ी रकम की नोटिस आने का उसे कोई कारण समझ में नहीं आ रहा है। उसके पिता रामचन्द्र कश्यप और मां कमला देवी ने बताया कि बड़ा बेटा पंकज कस्बे के चौराहे पर ठेली लगाता है, जबकि छोटा बेटा गोविन्द मजदूरी करता है। कई दिनों से परिवार के सदस्यों ने ठीक से भोजन तक नहीं किया है। यह नोटिस आठ जनवरी को जारी किया गया था।
छह साल पुराना कानपुर कनेक्शन
पीड़ित गोविन्द ने बताया था कि करीब छह वर्ष पहले शादी के बाद वह कानपुर में एक गुटखा कंपनी में चार महीने तक काम करने गया था। वहीं उसके भांजे अजय कुमार ने कुछ लोगों से काम दिलाने के नाम पर संपर्क कराया। एक महिला ने गरीबी रेखा के नीचे बैंक खाते के जरिए सरकारी लाभ दिलाने का लालच दिया। महिला के कहने पर दो लोगों ने सीतापुर जनपद के विसवां स्थित एचडीएफसी बैंक में खाता खुलवाया, जहां दो से तीन हजार रुपये नकद भी दिए गए। बाद में कोई लाभ नहीं मिला और गोविन्द गांव लौटकर खेती-बाड़ी व मजदूरी करने लगा। उसे आशंका है कि उसी खाते से जुड़ा मामला अब सामने आया है। गोविन्द ने बताया कि खाता खुलवाने वाले लोग पासबुक और बैंक से जुड़े सभी कागजात अपने साथ ले गए थे।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


