यूपी में अब पुलिस एनकाउंटर होते ही थानेदार को करना होगा ये काम, CBI तक से हो सकती है जांच
अब यदि किसी मुठभेड़ में बदमाश घायल होता है, तो संबंधित थाना प्रभारी को तुरंत उसी थाने या नजदीकी थाने में FIR दर्ज करानी होगी। यह एफआईआर मुठभेड़ के तुरंत बाद दर्ज की जाएगी, ताकि घटना का विधिवत रिकॉर्ड तैयार हो सके और जांच में पारदर्शिता बनी रहे।

UP Police Encounter News: उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद डीजीपी ने महाराष्ट्र मॉडल पर मुठभेड़ों की जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत अब मुठभेड़ जिस थाना क्षेत्र में होगी, वहीं पर केस दर्ज होगा। एनकाउंटर होते ही थानेदार को तुरंत एफआईआर दर्ज करानी होगी। इसकी विवेचना दूसरे थाने की पुलिस या फिर सीबीआई से कराई जाएगी। इस संबंध में डीजीपी ने पहले जारी आदेश का हवाला देते हुए सभी जिलों को इसका कड़ाई से अनुपालन करने का निर्देश दिया है।
जारी आदेश के अनुसार, अब यदि किसी मुठभेड़ में बदमाश घायल होता है, तो संबंधित थाना प्रभारी को तुरंत उसी थाने या नजदीकी थाने में एफआईआर दर्ज करानी होगी। यह एफआईआर मुठभेड़ के तुरंत बाद दर्ज की जाएगी, ताकि घटना का विधिवत रिकॉर्ड तैयार हो सके और जांच में पारदर्शिता बनी रहे। सबसे अहम बदलाव यह है कि दर्ज एफआईआर की जांच किसी अन्य थाने की पुलिस, सीबीसीआईडी या आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी।
तत्काल नहीं मिलेगा वीरता पुरस्कार
आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि मुठभेड़ के तुरंत बाद किसी पुलिसकर्मी को वीरता पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। पुरस्कार तभी दिया जा सकेगा, जब निष्पक्ष जांच में पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सही और न्यायसंगत साबित हो जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या निष्पक्षता की कमी पाई जाती है, तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित या उसके परिजन भी न्यायालय में शिकायत दर्ज करा कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। यह व्यवस्था लागू होने के बाद माना जा रहा है अब एनकाउंटरों को लेकर अधिक पारदर्शिता आएगी और लोगों के मन में किसी प्रकार का शक नहीं रह जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में होगी जांच की प्रक्रिया
जांच की पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में होगी, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पीयूसीएल मामले में तय गाइडलाइन का पालन हर हाल में अनिवार्य है। इसमें कोई अपवाद स्वीकार नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर में मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम आरोपी के रूप में दर्ज करना जरूरी नहीं है, बल्कि पूरी टीम का उल्लेख पर्याप्त होगा। इसके साथ ही घायल व्यक्ति का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य होगा और उसकी स्थिति का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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