आईआईटी कानपुर में कैंसर का रिसर्च हब, प्रो. बुशरा अतीक को मिली बड़ी जिम्मेवारी
IIT Kanpur News: आईआईटी कानपुर में कैंसर रिसर्च का हब बनेगा। तकनीक की मदद से कैंसर का प्रभावी इलाज खोजने के लिए बन रहे इस हब को जेनेटिक वैज्ञानिक प्रो. बुशरा हबीब लीड करेंगी।

ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बाद अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर कैंसर अनुसंधान का नया हब बनेगा। आईआईटी कानपुर में न सिर्फ कैंसर से जुड़ी विभिन्न बीमारियों पर अनुसंधान किया जाएगा, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक की मदद से प्रभावी इलाज का समाधान भी विकसित किया जाएगा। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) की ओर से आईआईटी कानपुर को कैंसर रिसर्च हब के लिए चुना गया है। कैंसर के इलाज से जुड़े अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
आईआईटी कानपुर में स्थापित होने वाले इस कैंसर रिसर्च हब की अगुवाई बायोसाइंस एंड बायो इंजीनियरिंग (बीएसबीई) विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. बुशरा अतीक करेंगी। रिसर्च हब मेडिकल साइंस, इंजीनियरिंग और डिजिटल तकनीक के समन्वय से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की दिशा में काम करेगा। इस परियोजना के तहत प्रमुख रूप से ओरल कैंसर, गॉल ब्लैडर कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर के कारणों पर गहन अध्ययन किया जाएगा। आधुनिक तकनीकों की मदद से मरीजों के उपचार को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कैंसर को आम तौर पर आनुवांशिक बीमारी माना जाता है, लेकिन देश में केवल लगभग 4 फीसदी मामले ही वंशानुगत होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इसके मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। प्रो. बुशरा के अनुसार यदि कोशिकाओं में होने वाले बदलावों की समय पर जानकारी मिल जाए, तो उपचार को बेहतर बनाया जा सकता है। वर्तमान में देश में कुछ सरकारी प्रयोगशालाओं में ही जीनोम सीक्वेंसिंग का कार्य हो रहा है, लेकिन इस दिशा में और व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। साथ ही मरीजों के डेटा का संग्रह भी जरूरी है, जिससे उनके उपचार के लिए सटीक दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकें।
आईआईटी कानपुर पहले से ही तकनीकी नवाचार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मानसिक स्वास्थ्य पहलुओं के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। संस्थान एआई पर आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशंस, एडवांस डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म और डिजिटल हेल्थ सिस्टम तैयार करने जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। संस्थान की प्रो. बुशरा अतीक और प्रो. अरुण शुक्ला पहले से ही कैंसर से जुड़े जीनोम और रिसेप्टर पर अनुसंधान और नवाचार कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने संसद को दिसंबर 2025 में एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत में 2024 में 15.30 लाख कैंसर रोगी मिले, जबकि साल भर में 8.7 कैंसर मरीजों की मौत हो गई थी।


