आईआईटी कानपुर में कैंसर का रिसर्च हब, प्रो. बुशरा अतीक को मिली बड़ी जिम्मेवारी

Apr 08, 2026 09:42 pm ISTRitesh Verma हिन्दुस्तान, प्रमुख संवाददाता, कानपुर
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IIT Kanpur News: आईआईटी कानपुर में कैंसर रिसर्च का हब बनेगा। तकनीक की मदद से कैंसर का प्रभावी इलाज खोजने के लिए बन रहे इस हब को जेनेटिक वैज्ञानिक प्रो. बुशरा हबीब लीड करेंगी।

आईआईटी कानपुर में कैंसर का रिसर्च हब, प्रो. बुशरा अतीक को मिली बड़ी जिम्मेवारी

ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बाद अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर कैंसर अनुसंधान का नया हब बनेगा। आईआईटी कानपुर में न सिर्फ कैंसर से जुड़ी विभिन्न बीमारियों पर अनुसंधान किया जाएगा, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक की मदद से प्रभावी इलाज का समाधान भी विकसित किया जाएगा। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) की ओर से आईआईटी कानपुर को कैंसर रिसर्च हब के लिए चुना गया है। कैंसर के इलाज से जुड़े अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

आईआईटी कानपुर में स्थापित होने वाले इस कैंसर रिसर्च हब की अगुवाई बायोसाइंस एंड बायो इंजीनियरिंग (बीएसबीई) विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. बुशरा अतीक करेंगी। रिसर्च हब मेडिकल साइंस, इंजीनियरिंग और डिजिटल तकनीक के समन्वय से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की दिशा में काम करेगा। इस परियोजना के तहत प्रमुख रूप से ओरल कैंसर, गॉल ब्लैडर कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर के कारणों पर गहन अध्ययन किया जाएगा। आधुनिक तकनीकों की मदद से मरीजों के उपचार को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कैंसर को आम तौर पर आनुवांशिक बीमारी माना जाता है, लेकिन देश में केवल लगभग 4 फीसदी मामले ही वंशानुगत होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इसके मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। प्रो. बुशरा के अनुसार यदि कोशिकाओं में होने वाले बदलावों की समय पर जानकारी मिल जाए, तो उपचार को बेहतर बनाया जा सकता है। वर्तमान में देश में कुछ सरकारी प्रयोगशालाओं में ही जीनोम सीक्वेंसिंग का कार्य हो रहा है, लेकिन इस दिशा में और व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। साथ ही मरीजों के डेटा का संग्रह भी जरूरी है, जिससे उनके उपचार के लिए सटीक दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकें।

आईआईटी कानपुर पहले से ही तकनीकी नवाचार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मानसिक स्वास्थ्य पहलुओं के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। संस्थान एआई पर आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशंस, एडवांस डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म और डिजिटल हेल्थ सिस्टम तैयार करने जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। संस्थान की प्रो. बुशरा अतीक और प्रो. अरुण शुक्ला पहले से ही कैंसर से जुड़े जीनोम और रिसेप्टर पर अनुसंधान और नवाचार कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने संसद को दिसंबर 2025 में एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत में 2024 में 15.30 लाख कैंसर रोगी मिले, जबकि साल भर में 8.7 कैंसर मरीजों की मौत हो गई थी।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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