कानपुर आईआईटी का ‘टेक्निकल विवाह’, मंत्र नहीं पढ़े जाते सूत्र, दूल्हा-दुल्हन बनते हैं लड़के

कानपुर, अभिषेक सिंह
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कानपुर आईआईटी का ‘टेक्निकल विवाह’ का आयोजन हुआ।  मंडप सजा, अग्निकुंड जलाया गया, बाराती डीजे की धुन पर जमकर थिरके और कनपुरिया हुल्लड़ के बीच नकली कट्टे भी लहराए गए। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यहां वैदिक मंत्रों की जगह इंजीनियरिंग और तकनीकी फार्मूले पढ़े जा रहे थे।

कानपुर आईआईटी का ‘टेक्निकल विवाह’, मंत्र नहीं पढ़े जाते सूत्र, दूल्हा-दुल्हन बनते हैं लड़के

UP News: आईआईटी कानपुर में अनुसंधान और तकनीक के माहौल के बीच उस समय पूरा कैंपस देसी रंग में रंग गया, जब यहां एक अनोखी शादी का आयोजन हुआ। मंडप सजा, अग्निकुंड जलाया गया, बाराती डीजे की धुन पर जमकर थिरके और कनपुरिया हुल्लड़ के बीच नकली कट्टे भी लहराए गए। शादी में मेहंदी और हल्दी से लेकर जयमाला तक हर रस्म निभाई गई, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यहां वैदिक मंत्रों की जगह इंजीनियरिंग और तकनीकी फार्मूले पढ़े जा रहे थे।

मंत्रोच्चार करने वाले पंडित नहीं बल्कि इंजीनियरिंग के छात्र थे, जबकि दुल्हन की भूमिका भी एक छात्र ने निभाई। दरअसल, यह कोई असली शादी नहीं बल्कि आईआईटी कानपुर में पिछले 32 वर्षों से चली आ रही एक अनोखी परंपरा है, जिसे बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र नाट्य मंचन और यादगार विदाई समारोह के रूप में आयोजित करते हैं। इस अनोखी शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे आईआईटी कानपुर की सबसे दिलचस्प परंपराओं में से एक बता रहे हैं।

मजाक-मस्ती में एक अनोखी शादी

वर्ष 1994 में आईआईटी कानपुर के बीटेक अंतिम वर्ष के कुछ छात्रों ने मजाक-मस्ती में एक ऐसी अनोखी शादी का आयोजन किया था, जो अब 32 साल बाद संस्थान की चर्चित परंपरा बन चुकी है। बताया जाता है कि इसकी प्लानिंग एक ट्रिप के दौरान हुई थी, जब छात्रों के बीच मनोरंजन के लिए नकली शादी कराने का विचार आया। शुरुआत में एक छात्रा को दुल्हन बनाने की बात हुई, लेकिन उसके मना करने पर एक छात्र ही दुल्हन बनने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद जिस अंदाज में शादी हुई, उसने सभी को इतना आकर्षित किया कि यह आयोजन हर साल अंतिम वर्ष के छात्रों की विदाई परंपरा का हिस्सा बन गया।

कनपुरिया अंदाज में नकली कट्टे भी लहराए

इस बार भी आईआईटी कानपुर में उसी परंपरा को पूरे देसी और कनपुरिया अंदाज में निभाया गया। दुल्हन बने छात्र विदित परमार की हल्दी और मेहंदी की रस्में धूमधाम से हुईं। हाल-6 में संगीत समारोह के दौरान छात्राओं ने दुल्हन की सहेलियों की भूमिका निभाते हुए बॉलीवुड गानों पर जमकर डांस किया और माहौल पूरी तरह शादी समारोह जैसा नजर आया। इसके बाद हाल-1 से दूल्हे की बारात निकाली गई। दूल्हा बने कुमार विशाल सेहरा बांधकर घोड़े पर सवार हुए और बारातियों के साथ हाल-6 की ओर रवाना हुए। रास्तेभर ढोल-नगाड़ों, डीजे और बॉलीवुड गीतों पर छात्र-छात्राएं झूमते रहे। कई छात्र कनपुरिया अंदाज में हुल्लड़ करते नजर आए तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में नकली कट्टे भी लहराए। पूरे कैंपस में बारात को देखने के लिए छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी।

द्वारचार, वरमाला और अन्य परंपराएं भी

हाल-6 पहुंचने पर द्वारचार, वरमाला और अन्य पारंपरिक रस्में निभाई गईं। हालांकि, इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि यहां वैदिक मंत्रों की जगह इंजीनियरिंग और तकनीकी फार्मूले पढ़े गए। पंडित की भूमिका में छात्र थे, जो मजाकिया अंदाज में तकनीकी सूत्रों के साथ विवाह संपन्न करा रहे थे। अग्निकुंड भी सजाया गया और पूरे आयोजन को पूरी पारंपरिक शैली में प्रस्तुत किया गया। आईआईटी कानपुर के छात्रों के लिए यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि चार वर्षों की दोस्ती, यादों और विदाई के भावनात्मक पलों को यादगार बनाने का जरिया बन चुका है।

Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey

दीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।

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